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ताराविभिन्न परम्पराओं में भिन्नadvanced_initiated_only

त्रीं

Trīṃ

TREEM

साझा

तारा · Tara, the second of the Dasa Mahavidya, the great Tantric Wisdom-Goddess of compassionate crossing

अर्थ

"'त्रीं' माँ तारा का बीज — दशमहाविद्या की द्वितीय देवी; भव-सागर से तारने वाली, मुक्ति-दायिनी शक्ति का एकाक्षर रूप"

'त्रीं' में तारा की वह तारण-शक्ति है जो अंधेरी रात में तारों की तरह मार्ग दिखाती है — अज्ञान, भय और संसार-बन्धन से परे ले जाती है

अक्षर

त + र + ई + ं (अनुस्वार); 'त' तारा का मूल बीज-स्वर; 'र' तारण (पार करना) की शक्ति; 'ई' देवी-शक्ति; 'ं' बिन्दु

Ta (त्)1

त — तारा का बीज-स्वर; तारण (भव-सागर से पार करना) की शक्ति

Ra (र्)2

र — गति और तारण का स्वर; अग्नि-शक्ति जो मार्ग प्रशस्त करती है

Ī (ी)3

ई — देवी-शक्ति; तारा माँ की दिव्य ऊर्जा और करुणा

Anusvāra (ं)4

ं (बिन्दु) — नाद-बिन्दु; मोक्ष का द्वार; महाशून्य का स्पर्श

पहला पाठीय संदर्भ: Tantric Shakta texts, particularly the Tara Tantra, the Nila Tantra, the Toḍala Tantra, and the Mantra Mahodadhi; also the Buddhist Tara Tantras of the Vajrayana tradition (where the Hindu-Buddhist Tara connection is most explicit)
Principal beej of the second Mahavidya. Trīṃ is one of the four most ugra (fierce) Mahavidya beejas, alongside Krīṃ (Kali), Hlīṃ (Bagalamukhi), and Dhūṃ (Dhumavati). Traditionally received through Shakta initiation.

उच्चारण कैसे करें

उच्चारण विधि

'त्रीं' — 'त्र' जैसे 'त्रिशूल' में (त + र संयुक्त), फिर दीर्घ 'ई', अन्त में अनुस्वार 'ं' — गहरी, तारती-सी मधुर ध्वनि

सामान्य गलती

'तरीं' या 'त्रिं' की तरह नहीं — 'त्र' संयुक्त व्यंजन एकसाथ बोला जाता है; 'ई' दीर्घ है; 'ं' को 'म' या 'न' में नहीं बदलते

अवधि

3 सेकंड प्रति दोहराव

चक्र संबंध

विभिन्न परम्पराओं में भिन्न

Varies by tradition

विशुद्ध चक्र (कंठ) — तारा का सम्बन्ध वाणी, तारण और आकाश-तत्त्व से

तारा-साधना में एकल-चक्र मानचित्रण परम्परागत नहीं है। बंगाली तांत्रिक परम्परा और बौद्ध वज्रयान दोनों अपने-अपने ढाँचों में तारा को समझाते हैं।

में पाया गया

त्रीं तारायै नमः — हिंदू तारा का मूल मंत्र (दीक्षा-अपेक्षित)

ओम तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा — बौद्ध हरी तारा का मंत्र

त्रीं ह्रीं हूं — तांत्रिक संयोजन (दीक्षा-अपेक्षित)

तारा हिंदू दशमहाविद्या (द्वितीय स्थान) और बौद्ध वज्रयान दोनों में पूजित हैं। हिंदू तारा तारापीठ (बीरभूम, पश्चिम बंगाल) में केन्द्रित हैं; बौद्ध तारा तिब्बत, भूटान, नेपाल और मंगोलिया में। दोनों में दीक्षा की आवश्यकता है।

जप कैसे करें

माला

Rudraksha

इस अक्षर के बारे में

ाँ तारा का नाम 'तारण' से आया है — जो भव-सागर से पार उतारे, जो तारों की तरह अंधेरी रात में मार्ग दिखाए। वे दशमहाविद्या की द्वितीय देवी हैं और काली के बाद सर्वाधिक पूजित हैं।

हिंदू तारा तारापीठ (बीरभूम, पश्चिम बंगाल) में केन्द्रित हैं — यह ५१ शक्ति-पीठों में से एक है। वामाखेपा (१८३७-१९०८) तारापीठ के महान तांत्रिक साधक थे। लोग उन्हें 'पागल बाबा' कहते थे क्योंकि उनका व्यवहार अपरंपरागत था — वे माँ तारा के पुत्र की तरह रहते थे।

बौद्ध वज्रयान में तारा एक पूर्ण-ज्ञान-प्राप्त बोधिसत्त्व हैं। हरी तारा (करुणा और मुक्ति) और सफेद तारा (दीर्घायु और ज्ञान) सर्वाधिक पूजित रूप हैं। 'ओम तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा' तिब्बत में सर्वाधिक जपा जाने वाला मंत्र है।

दोनों परम्पराओं में 'त्रीं' बीज का अपना-अपना रूप है — और दोनों में दीक्षा की आवश्यकता है।

पारंपरिक उपयोग

भव-सागर से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान

संकट में तीव्र रक्षा और मार्गदर्शन

वाक्-सिद्धि और अभय-प्राप्ति

गहन तांत्रिक साधना — केवल दीक्षित साधकों के लिए

आधुनिक भारत में

तारा की उपासना आधुनिक युग में विशेष रूप से प्रासंगिक है — वे अभय और मुक्ति की देवी हैं। भय, अनिश्चितता और अंधेरे में तारा का स्मरण — चाहे भक्ति-रूप में हो या ध्यान-रूप में — एक शक्तिशाली आध्यात्मिक अभ्यास है जो सभी के लिए सुलभ है।
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दीक्षा आवश्यक

'त्रीं' बीज का जप बंगाल की तांत्रिक तारा-परम्परा में और बौद्ध वज्रयान में दीक्षा के बाद उचित है। भक्ति-रूप में तारा-स्मरण सभी के लिए खुला है; व्यक्तिगत बीज-जप के लिए गुरु-दीक्षा आवश्यक है।

प्रश्न

स्रोत

  • · Tara Tantra
  • · Nila Tantra
  • · Mahanirvana Tantra
  • · Toḍala Tantra
  • · Bama Khepa tradition (oral and literary records)
  • · David Kinsley, 'Tantric Visions of the Divine Feminine'
  • · Buddhist Tara Tantras (Vajrayana sources)

तारा-साधना में एकल-चक्र मानचित्रण परम्परागत नहीं है। बंगाली तांत्रिक परम्परा और बौद्ध वज्रयान दोनों अपने-अपने ढाँचों में तारा को समझाते हैं।

किसी भी परंपरागत Hz (हर्ट्ज़) आवृत्ति का उल्लेख नहीं है। सॉल्फेजियो आवृत्ति के दावे आधुनिक न्यू-एज मान्यताएँ हैं, शास्त्रसम्मत नहीं।