ॐ शरवणभवाय नमः
Oṃ Śaravaṇabhavāya Namaḥ
Om Sharavanabhavaya Namah
कार्तिकेय · Kārttikeya, the eternally youthful warrior-god; the second son of Shiva and Parvati; the commander of the divine armies who slew the demon Tarakasura; called Murugan in Tamil tradition where he is the supreme deity
अर्थ
"Om. I bow to Śaravaṇabhava, Kartikeya, the eternally youthful warrior-god born from Shiva's tejas in the reed forest of Saravana, slayer of darkness and commander of the divine armies."
ॐ। मैं शरवणभव को नमन करता हूँ, कार्तिकेय, शिव के तेज से शरवण-वन में उत्पन्न, सदा युवा, अन्धकार के संहारक और दिव्य सेना के सेनापति।
शब्द दर शब्द
ब्रह्म का आदि नाद
The primordial sound
शरवणभव को, शरवण नामक नरकट-वन में उत्पन्न हुए; कार्तिकेय का यह नाम उस कथा से है जिसमें वे शिव के तेज से छह स्फुलिंगों के रूप में शरवण सरोवर में प्रकट हुए थे
To Śaravaṇabhava, literally 'the one born in the Śaravaṇa reed forest'; one of Kartikeya's primary names, referring to the legend that he was born in a lake of reeds beside the Ganga where his six sparks of Shiva-fire were nurtured by the six Krittika mothers
नमस्कार, समर्पण
Salutation, bowing, surrender
षडक्षर, छह अक्षर और छह मुख
कार्तिकेय षण्मुख हैं, छह मुख वाले, और उनकी उत्पत्ति शिव के तेज से छह स्फुलिंगों के रूप में हुई जिन्हें छह कृत्तिका माताओं (कृत्तिका नक्षत्र) ने पालन-पोषण किया, इसी से कार्तिकेय नाम मिला। मूल षडक्षरी मन्त्र के छह अक्षर, स-र-व-ण-भ-व, सीधे इन छह मुखों और छह स्फुलिंगों से सम्बद्ध हैं। मन्त्र का जप एक साथ छह मुखों का आह्वान है।
जप कैसे करें
सर्वोत्तम समय
- स्कंद षष्ठी — विशेषतः कार्तिक मास में; मुरुगन का सर्वोच्च उत्सव
- षष्ठी तिथि प्रत्येक मास — मुरुगन की पावन तिथि
- ब्रह्म मुहूर्त — सूर्योदय से पूर्व का अत्यंत पवित्र समय
- थाईपुसम और कवडी-यात्रा के दिन
- कृत्तिका नक्षत्र में — मुरुगन का जन्म-नक्षत्र, अत्यंत शुभ
माला
Rudraksha · Red coral
संख्या
१०८; उग्र साधना में ३ × १०८
आसन
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पद्मासन या सुखासन में बैठें।
तैयारी
स्नान करके लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। मुरुगन/कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र सामने रखें। लाल पुष्प, विशेषतः लाल लिली या गुड़हल, अर्पित करें। धूप और दीप जलाएँ।
Vaikhari
वाचिक
स्पष्ट उच्चारण के साथ मध्यम स्वर में जप — समूह-पूजा और प्रारंभिक अभ्यास के लिए उत्तम।
Upamsu
उपांशु
अत्यंत मृदु, केवल होठों की हलचल के साथ — व्यक्तिगत ध्यान और एकांत साधना के लिए।
Manasika
मानसिक
पूर्णतः मन के भीतर, बाहरी चेष्टा रहित — षडानन के दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए जप करें।
108× जप ऑडियो
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इस मंत्र के बारे में
'शरवण' का अर्थ है शर-वन — वह सरकंडों का वन जहाँ भगवान शिव की तेजोमयी अग्नि-स्फुलिंगें गिरीं। कृत्तिका देवियों — छः माताओं — ने उन दिव्य स्फुलिंगों का पोषण किया और उनसे षडानन कुमार का जन्म हुआ — छः मुखों वाले बालक। 'भव' का अर्थ है 'जन्म लेने वाले', अतः शरवणभव = शर-वन में जन्मे।
मुरुगन दक्षिण भारत के, विशेषतः तमिल संस्कृति के, परम देवता हैं। तमिल संगम-साहित्य में वे 'सेयोन' — लाल देवता — के नाम से विख्यात हैं। उनके छः मुख छः दिशाओं और ज्ञान के छः आयामों के प्रतीक हैं। उनका वाहन मयूर अहंकार और वासनाओं पर विजय का प्रतीक है, और उनका आयुध 'वेल' (शक्ति-शूल) वह दिव्य ज्ञान-शक्ति है जो अज्ञान का भेदन करती है। माँ पार्वती ने स्वयं यह वेल मुरुगन को प्रदान किया था।
यह मंत्र शक्ति के महादेवता को आह्वान करता है — वे देवसेनापति हैं जिन्होंने तारकासुर का वध किया। साधक इस मंत्र द्वारा अपने भीतर के 'तारकासुर' — अहंकार, कामना और भय के असुरों — को परास्त करने की शक्ति माँगता है।
मूल
- स्रोत
- Skanda Purana, the largest of the Mahapuranas, devoted entirely to Skanda-Kartikeya and his deeds
- परंपरा
- Universal across Hindu sampradāyas, but with particular intensity in the Tamil Kaumara tradition where Murugan is the supreme deity (not merely Shiva's son). The Tamil Sangam-era poems (1st–3rd century CE) already establish Murugan as Tamil land's chief god. The six abodes of Murugan, Aru Padai Veedu, across Tamil Nadu remain among the most important pilgrimage sites in South India.
- प्राचीनता
- ~2,500 वर्ष
- में भी संदर्भित
- · Subramanya Bhujangam, Adi Shankaracharya's hymn to Subramanya
- · Kandar Anubhuti, by Arunagirinathar (15th century Tamil saint)
- · Thiruppugazh, Arunagirinathar's vast corpus of Tamil hymns to Murugan
- · Mahabharata, Aranyaka Parva (Kartikeya's birth narrative)
- · Kumarasambhava by Kalidasa
- · Kartikeya Upanishad
पारंपरिक लाभ
- भगवान मुरुगन की कृपा से शत्रुओं पर विजय और जीवन की बाधाओं का नाश होता है
- देवसेनापति के आशीर्वाद से युद्ध-कौशल, नेतृत्व और दिव्य शौर्य का संचार होता है
- षडानन देव की उपासना से ज्ञान, विवेक और बुद्धि की अभूतपूर्व वृद्धि होती है
- नकारात्मक शक्तियों, काले जादू और ग्रह-दोषों से सम्पूर्ण रक्षा मिलती है
- कुंडलिनी शक्ति के जागरण और आध्यात्मिक उत्थान की यात्रा में यह मंत्र सहायक है
- दाम्पत्य जीवन में सुख, संतान-प्राप्ति और कुल की सम्पूर्ण उन्नति का वरदान
ये परंपरागत आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं। यह मंत्र-जप आत्म-शुद्धि और भक्ति के लिए है — यह चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है।
रोजमर्रा के भारत में यह मंत्र
आधुनिक जीवन की प्रतिस्पर्धाओं, नेतृत्व की चुनौतियों और मानसिक संघर्षों में यह मंत्र विशेष रूप से प्रासंगिक है। युवाओं और विद्यार्थियों के लिए यह मंत्र अत्यंत उपयोगी है — मुरुगन ज्ञान और शौर्य दोनों के देवता हैं। विश्व भर के तमिल प्रवासी समुदाय इस मंत्र को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अभिन्न अंग मानते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्रोत और ईमानदारी
- · Skanda Purana
- · Mahabharata, Aranyaka Parva
- · Kumarasambhava, Kalidasa
- · Subramanya Bhujangam, Adi Shankaracharya
- · Kandar Anubhuti and Thiruppugazh, Arunagirinathar
- · Kartikeya Upanishad
किसी भी परंपरागत Hz (हर्ट्ज़) आवृत्ति का उल्लेख नहीं है। सॉल्फेजियो आवृत्ति के दावे आधुनिक न्यू-एज मान्यताएँ हैं, शास्त्रसम्मत नहीं।
कुछ आधुनिक तांत्रिक संदर्भों में षडाक्षरी के छह अक्षरों को मूलाधार से आज्ञा तक के छह चक्रों से जोड़ा जाता है (सहस्रार को सातवाँ और कार्तिकेय के षण्मुख-स्वरूप से परे माना जाता है)। यह एक आधुनिक व्यवस्था है; शास्त्रीय कौमार साधना कार्तिकेय के षण्मुख तत्त्वशास्त्र और अंतर्योद्धा-दृष्टि के आधार पर मंत्र को समझती है, न कि चक्र-रचना के आधार पर।