ॐ श्री हनुमते नमः
Oṃ Śrī Hanumate Namaḥ
Om Sri Hanumate Namah
हनुमान · Hanumān, son of Anjana and the wind-god Vāyu, eternal devotee of Rama, the immortal Chiranjeevi who carries Rama in his heart in every age
अर्थ
"Om. I bow to Śrī Hanuman, the eternal devotee of Rama, the strength of the surrendered, the one in whom Rama is always present."
ॐ। मैं श्री हनुमान् को नमन करता हूँ, श्रीराम के नित्य भक्त, समर्पितों के बल, जिनके भीतर राम सदा वास करते हैं।
शब्द दर शब्द
ब्रह्म का आदि नाद
The primordial sound
शुभ; आदरसूचक; और लक्ष्मी-सीता का नाम
Auspicious; reverential prefix; also the name of Lakshmi-Sita, placing Hanuman in the lineage of Rama-Sita's most beloved devotee
हनुमान् को, जिनकी ठोढ़ी पर इन्द्र के वज्र का चिन्ह है
To Hanuman (dative case), literally 'the one with a strong jaw' (hanu = jaw), referring to the incident when as a child he was struck on the jaw by Indra's vajra
नमस्कार, समर्पण
Salutation, bowing, surrender
हनुमान, भक्ति का स्वरूप
हिन्दू परम्परा में हनुमान् वर मांगने के लिए नहीं, वरन् भक्त के पूर्ण स्वरूप के रूप में पूज्य हैं। तुलसीदास हनुमान चालीसा में उन्हें राम का दूत और दास कहते हैं, उनकी सम्पूर्ण शक्ति इसी समर्पण से आती है। ॐ श्री हनुमते नमः मन्त्र का जप केवल हनुमान् को प्रणाम नहीं है, यह भक्त बनने का ध्यान है, समर्पण से आया साहस, राम-स्मरण से आया बल।
जप कैसे करें
सर्वोत्तम समय
- मंगलवार और शनिवार — हनुमान जी के विशेष दिन
- ब्रह्म मुहूर्त — सूर्योदय से पूर्व का अत्यंत पवित्र समय
- हनुमान जयंती — चैत्र पूर्णिमा (अयोध्या परम्परा)
- सूर्यास्त के बाद — रात्रि में हनुमान-जप विशेष फलदायी माना जाता है
- किसी संकट या भय के समय — आपातकालीन भक्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ
माला
Rudraksha · Red coral
संख्या
१०८; संकट में ३ × १०८ या निरंतर जप
आसन
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। यात्रा में, कार्यस्थल पर, किसी भी परिस्थिति में जप किया जा सकता है।
तैयारी
स्नान करके लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। लाल पुष्प और बेसन के लड्डू या केले का भोग लगाएँ।
Vaikhari
वाचिक
उच्च स्वर में जोश और भक्ति के साथ जप — समूह-पाठ और संकीर्तन के लिए उत्तम।
Upamsu
उपांशु
मृदु स्वर में, होठों की हलचल के साथ — एकांत ध्यान और व्यक्तिगत साधना के लिए।
Manasika
मानसिक
मन के भीतर, बाहरी चेष्टा रहित — हनुमान जी के संजीवनी-पर्वत उठाते दिव्य स्वरूप का ध्यान करते हुए।
108× जप ऑडियो
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इस मंत्र के बारे में
'ॐ श्री हनुमते नमः' — इस मंत्र में तीन तत्त्व हैं। 'ॐ' — प्रणव, सार्वभौम चेतना। 'श्री' — दिव्य ऐश्वर्य और कृपा। 'हनुमते' — हनुमान को, चतुर्थी विभक्ति में। 'नमः' — समर्पण, मेरा अहंकार तुम्हारे चरणों में।
हनुमान जी की महिमा अद्वितीय है। वाल्मीकि-रामायण के सुन्दरकाण्ड में उनका सर्वोत्तम चरित्र-चित्रण है — समुद्र-लंघन, सीता-खोज, लंका-दहन और राम का संदेश पहुँचाना। तुलसीदास ने हनुमान-चालीसा में उनकी स्तुति की जो भारत में सर्वाधिक पठित स्तोत्र बन गया।
हनुमान जी दासत्व (सेवा-भाव) के आदर्श हैं। वे इतने शक्तिशाली हैं, परन्तु सदा राम के सेवक बने रहते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी शिक्षा है: सच्ची शक्ति अहंकार में नहीं, समर्पण में है। मध्व-सम्प्रदाय में हनुमान जी वायु के अवतार हैं — उनकी उपासना से प्राण-शक्ति का विकास होता है।
मूल
- स्रोत
- Hanuman Upanishad, a minor Upanishad of the Atharvaveda tradition
- परंपरा
- Vaishnava, specifically Ram bhakti. Also revered across all Hindu traditions as the universal protector. The Madhva sampradaya holds Hanuman as a special form of Vāyu, the wind-deity, and treats him with elevated status as one of the three Vāyu-avatars (alongside Bhima and Madhva himself).
- प्राचीनता
- ~2,000 वर्ष
- में भी संदर्भित
- · Sundarakanda of the Valmiki Ramayana, the primary source of Hanuman's character and deeds
- · Hanuman Chalisa by Tulsidas (c. 1575 CE)
- · Hanumad Ashtottara Shatanama Stotra (108 names of Hanuman)
- · Hanumad Sahasranama
- · Anjaneya Sahasranama
- · Parashara Samhita, Hanuman mantra-shastra section
- · Skanda Purana
पारंपरिक लाभ
- भगवान हनुमान की कृपा से अटल शक्ति, साहस और सभी बाधाओं पर विजय मिलती है
- भूत, प्रेत, काले जादू और नकारात्मक शक्तियों से सम्पूर्ण सुरक्षा मिलती है
- दासत्व-भाव की साधना से अहंकार का क्षय होता है और भगवत्कृपा का द्वार खुलता है
- वायुपुत्र के आशीर्वाद से प्राण-शक्ति, स्वास्थ्य और जीवन-ऊर्जा का संचार होता है
- राम-नाम के सबसे बड़े भक्त की उपासना से राम-कृपा भी स्वतः प्राप्त होती है
- भय, चिंता और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है
ये परंपरागत आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं। यह मंत्र-जप आत्म-शुद्धि और भक्ति के लिए है — यह चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है।
रोजमर्रा के भारत में यह मंत्र
भय, तनाव और नकारात्मकता के इस युग में हनुमान जी की उपासना लाखों भारतीयों को साहस और स्थिरता देती है। परीक्षा से पहले, यात्रा में, अस्पताल में, किसी संकट में — हनुमान जी 'तत्काल' देवता हैं जो हर परिस्थिति में उपलब्ध हैं। उनकी पूजा में कोई जाति-भेद नहीं, कोई दीक्षा की शर्त नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्रोत और ईमानदारी
- · Hanuman Upanishad (Atharvaveda tradition)
- · Sundarakanda, Valmiki Ramayana
- · Hanuman Chalisa, Tulsidas
- · Parashara Samhita, Hanuman mantra-shastra section
- · Hanumad Sahasranama
- · Skanda Purana, Shani-Hanuman narrative
किसी भी परंपरागत Hz (हर्ट्ज़) आवृत्ति का उल्लेख नहीं है। सॉल्फेजियो आवृत्ति के दावे आधुनिक न्यू-एज मान्यताएँ हैं, शास्त्रसम्मत नहीं।
हनुमान भक्ति में चक्र-मानचित्रण केंद्रीय नहीं है। यह मंत्र दासत्व (समर्पित सेवा) और भक्ति-रस की दृष्टि से समझा जाता है।