ॐ दत्तप्रियाय नमः
दत्तप्रियः
Dattapriyaḥ
Root: datta + priya
अर्थ
The one who is dear to Datta, or who holds Datta as his most beloved; the deity whose very name contains his own joy
जो दत्त को प्रिय हैं, अथवा जिन्हें दत्त सर्वप्रिय है; वह देवता जिनके नाम में ही उनका आनन्द है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
दत्त
the given one, Dattatreya himself
दत्त, दत्तात्रेय स्वयं
प्रिय
beloved, dear
प्रिय, आत्मीय
आधुनिक संदर्भ
दत्तप्रिय एक आत्म-सन्दर्भित नाम है: दत्तात्रेय स्वयं दत्त के प्रिय हैं। यह वृत्तीय नाम अद्वैत सत्य की ओर संकेत करता है कि भक्त और देवता अलग नहीं हैं: भक्त के दत्त के प्रति प्रेम दत्त का भक्त के हृदय के माध्यम से अनुभव किया जाने वाला अपने लिए प्रेम ही है। भारत के महान भक्ति कवियों ने इस दर्पण-प्रेम के बारे में लिखा: मीराबाई का कृष्ण-प्रेम, तुकाराम का विट्ठल-प्रेम, रामकृष्ण का काली-प्रेम। पुणे, नाशिक और कोल्हापुर के घरों में गुरुवार भजन सभाओं में यह वृत्तीय प्रेम सामूहिक रूप से जिया जाता है।
कब जपें
ॐChant as an affectionate, intimate invocation of Dattatreya, when feeling the warmth of personal love for the deity, or at the simple moment of calling Datta with a full heart.
और भक्ति नाम
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