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ॐ मुनिसंघनुताय नमः

मुनिसंघनुतः

Munisaṃghanutaḥ

Root: muni + saṃgha + nuta

Devotion·भक्ति
Meaning

अर्थ

The one praised by the assemblies of sages, who is glorified by every gathering of realised beings across all traditions

मुनि-समूहों द्वारा स्तुत, जो सभी परम्पराओं में सिद्ध पुरुषों की प्रत्येक सभा द्वारा महिमामण्डित हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

मुनि

sage, silent meditant

मुनि, मौनी साधक

संघ

assembly, community

संघ, समूह

नुत

praised, glorified

स्तुत, महिमामण्डित

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

मुनिसंघनुत दत्तात्रेय को उन ऋषियों के समुदाय में स्थापित करता है जो एक-दूसरे की साक्षात्कार को पहचानते और प्रशंसा करते हैं। मुनि-संघ (ऋषियों की सभा) भारत की वैदिक और उत्तर-वैदिक परम्परा में एक ऐतिहासिक वास्तविकता और कुम्भ मेलों और महन्त सभाओं में एक जीवन्त वास्तविकता है। प्रयागराज कुम्भ मेले में, पृथ्वी पर सबसे बड़ी मानव सभा, दर्जनों सम्प्रदायों के प्रतिनिधि एकत्र होते हैं और दत्तात्रेय की परम्परा सदा प्रतिनिधित्व पाती है। नाशिक कुम्भ (सिंहस्थ) में, जो त्र्यम्बकेश्वर के पास गोदावरी के तट पर हर बारह वर्षों में होता है, दत्तात्रेय के मुनि सबसे प्रमुखों में हैं।

When to Chant

कब जपें

Chant during satsang gatherings of spiritual seekers, at ashram festivals, or to invoke Dattatreya's blessing over any community assembled in the spirit of shared seeking.

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