ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः
क्षेत्रज्ञ
Kṣetrajña
Root: kṣetra + jña
अर्थ
The knower of every field and every body in creation
सम्पूर्ण क्षेत्रों (शरीरों) के ज्ञाता, हर देह में विराजमान साक्षी
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
क्षेत्र
field, body, domain
क्षेत्र, शरीर, देह
ज्ञ
knower, one who knows
जानने वाला, ज्ञाता
आधुनिक संदर्भ
गीता के तेरहवें अध्याय का नाम ही 'क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग' है — शरीर क्षेत्र है और आत्मा (भगवान) क्षेत्रज्ञ। क्षेत्रज्ञ हर शरीर को जानते हैं — बच्चे का, बूढ़े का, स्त्री का, पुरुष का, पशु का। जब डॉक्टर शरीर की जाँच करे, वह बाहरी क्षेत्रज्ञ है; पर असली क्षेत्रज्ञ तो भीतर बैठे भगवान हैं।
कब जपें
ॐChant during Gita Chapter 13 study, body-awareness meditation, or when seeking health insights. Ideal during yoga practice and when contemplating the body-soul distinction.
और विद्या नाम
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