ॐ सर्वभक्तवशाय नमः
सर्वभक्तवश
Sarvabhaktavaśa
Root: sarva + bhakta + vaśa
अर्थ
He who willingly comes under the loving control of every devotee
सम्पूर्ण भक्तों के वश में आने वाले, प्रेम से भक्तों के नियन्त्रण में रहने वाले
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सब
भक्त
devotee
भक्त
वश
under control, submissive to, willing captive
वश, नियन्त्रण में
आधुनिक संदर्भ
सर्वशक्तिमान भगवान — जो ब्रह्माण्ड चलाते हैं — भक्त के प्रेम के आगे वश (helpless) हो जाते हैं। यशोदा ने कृष्ण को रस्सी से बाँधा — सर्वेश्वर माँ के प्रेम में वश। गोपियों ने बाँसुरी छुपाई — कृष्ण भक्तों के वश। सर्वभक्तवश सबसे शक्तिशाली सत्य यह बताता है — भगवान भक्तों के प्रेम के दास हैं। ब्रह्माण्ड का स्वामी एक भक्त की प्रार्थना में बँध जाता है।
कब जपें
ॐChant during intimate personal prayer, when the power of bhakti needs affirming, or during Yashoda-Krishna meditation. Ideal during Janmashtami and when devotion's supremacy over divine power is celebrated.
और प्रेम नाम
← → arrow keys to navigate