ॐ वृषाकपये नमः
वृषाकपिः
Vṛṣākapiḥ
Root: vṛṣa + kapi
अर्थ
He who showers dharma like rain upon the world
जो धर्म की वर्षा करते हैं, या जो वृष (धर्म) और कपि (वराह) रूप हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
वृष
dharma, righteousness, rain
धर्म, वर्षा
कपि
boar (varaha), or monkey
वराह, वानर
आधुनिक संदर्भ
मानसून का इंतज़ार हर भारतीय किसान की ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण समय है। जब पहली बारिश की बूँदें सूखी ज़मीन पर पड़ती हैं, तो किसान आसमान की ओर हाथ उठाकर भगवान का शुक्रिया करता है। वृषाकपि वही वर्षा के स्वामी हैं जो धर्म की बारिश करते हैं। जैसे बारिश बिना भेदभाव सब पर बरसती है, वैसे ही भगवान की कृपा।
कब जपें
ॐChant at the onset of monsoon, during agricultural prayers, on Varaha Jayanti, or when praying for dharma to prevail in unjust situations.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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