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057dharana
The Sensesइंद्रियDharana 57 5–20 minAudio coming soon
The Steady Gaze
टिकी हुई दृष्टि
ॐ
एक धीमे रोशनी वाले कमरे में बैठिए, आँखों की ऊँचाई पर लगभग एक हाथ की दूरी पर मिट्टी का छोटा दीया रख दीजिए. उसे जलाइए. सीधे बैठकर लौ को कोमलता से देखिए, ज़रूरत पर ही पलक झपकाइए. कुछ मिनटों में आँखों में पानी आ जाता है. तब आँखें बंद कीजिए, और बंद पलकों के भीतर लौ की छाप तब तक रहने दीजिए जब तक वह मिट न जाए. यह त्राटक है, भक्ति की स्थिरता का पुराना अभ्यास. बाहर की लौ भीतर की दृष्टि को बैठना सिखा रही है. लौ के जाने के बाद भी कुछ स्थिर बचा रहता है. उसी के साथ रहिए.