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The Tears of Bhakti
080dharana
Devotionभक्तिDharana 80 5–15 minAudio coming soon

The Tears of Bhakti

भक्ति के आँसू

शांति से बैठिए और किसी ऐसे क्षण को याद कीजिए जब भक्ति ने आपको आँसुओं तक ले गया था. शायद कोई भजन जिसने भीतर कुछ खोल दिया, शायद पुरी में जगन्नाथ रथ का पहला दर्शन, शायद किसी मंदिर में बच्चे को गोद में लिए रहना, शायद रात देर तक कबीर या मीरा की एक पंक्ति पढ़ना. उस क्षण को धीरे से लौटा लाइए. आँसुओं के पीछे मत भागिए. बस छाती की कोमलता को महसूस कीजिए, भक्ति की वह नरम गरम भारी चीज़ जब वह शुद्ध होती है. यही कोमलता हृदय का सच्चा आकार है. आँसू तो बस उसके भीगे किनारे थे.