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The Final Letting Go
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Onenessअद्वैतDharana 111 VariableAudio coming soon

The Final Letting Go

अंतिम छोड़

किसी लंबे ध्यान के अंत की ओर, जब शरीर टिक चुका हो और साँस शांत हो, एक विशेष क्षण की प्रतीक्षा कीजिए. अभ्यास को थामे रखने की आख़िरी छोटी कोशिश ढीली पड़ती है. अपेक्षा, नियंत्रण, यहाँ तक कि अच्छे से ध्यान करने की इच्छा, सब एक साथ छूट जाते हैं. मन बैठ जाता है. शरीर बैठ जाता है. बोध बस उपस्थित है, बिना हिले, बिना ज़ोर के. इस क्षण का पीछा मत कीजिए. जब यह आए तो बस पहचानिए, और जब तक रहे रहिए. अभ्यास का पहले का सब कुछ कुर्सी तैयार कर रहा था. यह क्षण अंत में उसी कुर्सी पर बैठ जाना है.