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The Threshold Hours
050dharana
Sleep & Dreamनिद्रा व स्वप्नDharana 50 15–30 minAudio coming soon

The Threshold Hours

देहली की घड़ियाँ

सुबह की पहली रोशनी में या शाम की ढलती रोशनी में बाहर बैठिए, छत पर, बगीचे में, खुली खिड़की के पास. इस घड़ी की रोशनी न दिन की तरह बरतती है न रात की तरह. यह एक धीमा मोड़ है, न यह न वह. परिवर्तन को सूर्योदय या सूर्यास्त नाम मत दीजिए. बस रोशनी को वह बनते देखिए जो वह बन रही है. ध्यान दीजिए कि इस समय मन में भी एक कोमल भाव होता है. संसार दिखा रहा है कि सीमाएँ उतनी पक्की नहीं जितनी बाक़ी दिन दिखाता है. जब तक देहली पूरी पार न हो, बैठे रहिए.