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065dharana
The Sensesइंद्रियDharana 65 10–20 minअभ्यास पाठ उपलब्ध; निर्देशित ऑडियो जल्द आएगा
Together, Not One After the Other
साथ साथ, एक के बाद एक नहीं
ॐ
बैठिए और अपने सामने किसी एक चीज़ को देखिए, गुलदस्ते का फूल, पीतल का दीया, या चाय के कप का किनारा. आम तौर पर लगता है कि वस्तु पहले होती है और उसका बोध बाद में आता है. आज ध्यान से देखिए. आप ऐसा कोई पल नहीं ढूँढ़ पाएँगे जब वस्तु बिना बोध के हो, या बोध बिना वस्तु के. दोनों एक साथ आते हैं, जैसे दोनों हाथों से एक ही ताली बजती है. इसी एक साथ आने में टिकिए, साँस दर साँस. संसार और उसके जानने वाले के बीच की दीवार उतनी मोटी नहीं जितना दिन भर लगता है.