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Whatever Light Is Already There
069dharana
Light & Radianceप्रकाशDharana 69 10–20 minAudio coming soon

Whatever Light Is Already There

जो रोशनी पहले से है

किसी शांत कमरे में आराम से बैठिए, आँखें कोमलता से बंद. कुछ साधक पलकों के पीछे एक हल्की भीतरी आभा देखते हैं, सुनहरी सी झलक, धीमी सी कँपन, कभी कुछ ख़ास नहीं, केवल चमक का एक भाव. आज देखिए, पर तलाशिए मत. कुछ कोमल दिखे तो उसी के साथ बैठिए. कुछ न दिखे तो अंधेरे के साथ रहिए, वह भी एक तरह का प्रकाश है. दोनों ठीक हैं. लक्ष्य कुछ ख़ास देखना नहीं है. लक्ष्य यह पहचानना है कि जो प्रकाश को, किसी भी रूप में, देख रहा है, वह स्वयं पहले से चमक रहा है.