प्रभास खण्ड · अध्याय 189
कर्ममोटीमाहात्म्यवर्णनम्
श्लोक 1 (skanda.7.189.1)
ईश्वर उवाच। तस्यैव पश्चिमे भागे नातिदूरे व्यवस्थितम्। चण्डिका कर्ममोटी च योगिनी कोटिसंयुता। पीठत्रयं महादेवि आद्यं त्रैलोक्यवन्दितम्
īśvara uvāca| tasyaiva paścime bhāge nātidūre vyavasthitam| caṇḍikā karmamoṭī ca yoginī koṭisaṁyutā| pīṭhatrayaṁ mahādevi ādyaṁ trailokyavanditam
ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, उसी के पश्चिम भाग में न अधिक दूर पर चण्डिका, कर्ममोटी और करोड़ों योगिनियों से युक्त वह आदि पीठत्रय स्थित है, जो तीनों लोकों में वन्दित है।
श्लोक 2 (skanda.7.189.2)
नवम्यां तत्र संपूज्य देवीपीठं च योगिनीम्। स सर्वान्प्राप्नुयात्कामान्भवेत्स्वर्गांगनाप्रियः
navamyāṁ tatra saṁpūjya devīpīṭhaṁ ca yoginīm| sa sarvānprāpnuyātkāmānbhavetsvargāṅganāpriyaḥ
नवमी तिथि को वहाँ देवीपीठ और योगिनी का सम्यक् पूजन करने वाला मनुष्य समस्त कामनाओं को प्राप्त करता है तथा स्वर्गांगनाओं का प्रिय बनता है।