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प्रभास खण्ड · अध्याय 193

यमेश्वरमाहात्म्यवर्णनम्

अध्याय 192अध्याय-सूचीअध्याय 194

श्लोक 1 (skanda.7.193.1)

ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि यमेश्वरमनुत्तमम्। तस्यैव नैर्ऋते भागे नातिदूरे व्यवस्थितम्

īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi yameśvaramanuttamam| tasyaiva nairṛte bhāge nātidūre vyavasthitam

ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, तदनन्तर उस अनुपम यमेश्वर की ओर जाना चाहिए, जो उसी के नैऋत्य भाग में न अधिक दूर पर स्थित है।

श्लोक 2 (skanda.7.193.2)

दर्शनात्पापशमनं सर्वकामफलप्रदम्

darśanātpāpaśamanaṁ sarvakāmaphalapradam

उसका दर्शन पापों का शमन करने वाला तथा समस्त कामनाओं का फल देने वाला है।

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