प्रभास खण्ड · अध्याय 264
नन्दिनी गुफा माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.264.1)
ईश्वर उवाच। तत्रैव संस्थिता देवि गुफा पातकनाशिनी। ऋषीणां संस्थितिर्यत्र सिद्धानां पुण्यचेतसाम्॥
īśvara uvāca| tatraiva saṁsthitā devi guphā pātakanāśinī| ṛṣīṇāṁ saṁsthitiryatra siddhānāṁ puṇyacetasām||
ईश्वर ने कहा—हे देवी! वहीं पापों का नाश करने वाली एक गुफा है, जो पुण्यात्मा ऋषियों और सिद्धों के निवास का स्थान है।
श्लोक 2 (skanda.7.264.2)
तत्र गत्वा महादेवि गुफां यः पश्यते नरः। स मुक्तः सर्वपापेभ्यश्चांद्रायणफलं लभेत्॥
tatra gatvā mahādevi guphāṁ yaḥ paśyate naraḥ| sa muktaḥ sarvapāpebhyaścāṁdrāyaṇaphalaṁ labhet||
हे महादेवी! जो मनुष्य वहाँ जाकर उस गुफा का दर्शन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर चान्द्रायण व्रत का फल प्राप्त करता है।