Skip to main content

प्रभास खण्ड · अध्याय 286

बालार्क माहात्म्य वर्णन

अध्याय 285अध्याय-सूचीअध्याय 287

श्लोक 1 (skanda.7.286.1)

ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि बालार्कं पापनाशनम्। अगस्त्याश्रमतो देवि उत्तरे नातिदूरतः

īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi bālārkaṁ pāpanāśanam| agastyāśramato devi uttare nātidūrataḥ

ईश्वर ने कहा—हे महादेवी, फिर पापनाशक बालार्क तीर्थ में जाना चाहिए, जो हे देवी, अगस्त्याश्रम से उत्तर दिशा में अधिक दूर नहीं है।

श्लोक 2 (skanda.7.286.2)

बाल एव तु यत्रार्कस्तपस्तेपे पुरा प्रिये। तेन बालार्क इत्येतन्नाम ख्यातं धरातले

bāla eva tu yatrārkastapastepe purā priye| tena bālārka ityetannāma khyātaṁ dharātale

हे प्रिये, जहाँ सूर्य ने बाल्यावस्था में ही पूर्वकाल में तपस्या की थी, इसीलिए यह 'बालार्क' नाम पृथ्वी पर प्रसिद्ध हुआ।

श्लोक 3 (skanda.7.286.3)

तं दृष्ट्वा रविवारेण न कुष्ठी जायते नरः। बालानां रोगजा पीडा न संभूयात्कदाचन

taṁ dṛṣṭvā ravivāreṇa na kuṣṭhī jāyate naraḥ| bālānāṁ rogajā pīḍā na saṁbhūyātkadācana

रविवार को उनके दर्शन करने से मनुष्य कुष्ठ रोग से ग्रस्त नहीं होता, और बालकों को रोगजनित पीड़ा कभी नहीं होती।

अध्याय 285अध्याय-सूचीअध्याय 287