प्रभास खण्ड · अध्याय 356
शृंगेश्वरमाहात्म्यवर्णनम्
श्लोक 1 (skanda.7.356.1)
ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि शृंगेश्वरमनुत्तमम्। शुकस्थानस्य सान्निध्ये सर्वपातकनाशनम्
īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi śṛṅgeśvaram anuttamam| śukasthānasya sānnidhye sarvapātakanāśanam
ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, तदनन्तर शुकस्थान के समीप स्थित, सम्पूर्ण पापों के नाशक अनुपम शृंगेश्वर के पास जाना चाहिए।
श्लोक 2 (skanda.7.356.2)
स्नात्वा तत्रैव विधिवच्छृंगेशं पूजयेन्नरः। मुक्तः स्यात्पातकैः सर्वैर्ऋष्यशृंगो यथा पुरा
snātvā tatraiva vidhivacchṛṅgeśaṁ pūjayennaraḥ| muktaḥ syātpātakaiḥ sarvairṛṣyaśṛṅgo yathā purā
वहीं स्नान करके तथा विधिपूर्वक शृंगेश का पूजन करके मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है, जैसे पूर्वकाल में ऋष्यशृंग हुए थे।