फ्रौं
Phrauṃ
F-ROW-M (the 'F' is aspirated, the 'ow' rhymes with 'now')
हनुमान · Hanuman
अर्थ
"'फ्रौं' भगवान हनुमान का तांत्रिक बीज — वायुपुत्र की उग्र-रक्षात्मक शक्ति का एकाक्षर रूप"
'फ्रौं' में हनुमान की वह वायु-शक्ति है जो तत्काल गति से कहीं भी पहुँचती है और शत्रुओं, बाधाओं तथा नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करती है
अक्षर
फ्र + औ + ं (अनुस्वार); 'फ्र' वायु-शक्ति का तीव्र स्वर; 'औ' हनुमान की गर्जना; 'ं' बिन्दु
फ्र — वायु-तत्त्व का तीव्र, गतिशील स्वर; हनुमान की समुद्र-लंघन-शक्ति
औ — हनुमान की विजयी गर्जना; राम-कार्य सम्पन्न होने की घोषणा
ं (बिन्दु) — नाद-बिन्दु; प्राण-शक्ति का केन्द्र
The bindu, the seed of withdrawal back to the source
उच्चारण कैसे करें
उच्चारण विधि
'फ्रौं' — 'फ्र' में 'फ' और 'र' संयुक्त (जैसे 'from' में), फिर दीर्घ 'औ' और अनुस्वार 'ं' — शक्तिशाली, तीव्र ध्वनि
सामान्य गलती
यह बीज उच्चारण में कठिन है। 'फ' और 'र' को अलग-अलग नहीं बोलते। 'औ' को 'ओ' में नहीं बदलते। गुरु-मुख से उच्चारण सीखना श्रेयस्कर है।
अवधि
3 सेकंड प्रति दोहराव
चक्र संबंध
मणिपुर
↗Manipura (Solar Plexus)
मणिपूर (नाभि-शक्ति) — हनुमान की प्राण-शक्ति और बल
आधुनिक तांत्रिक 'फ्रौं' को मणिपूर चक्र से जोड़ते हैं क्योंकि हनुमान शक्ति, साहस और प्राण-ऊर्जा के देवता हैं। कुछ परम्पराएँ इसे वक्षस्थल से भी जोड़ती हैं — हनुमान के हृदय में राम का निवास।
में पाया गया
ॐ फ्रौं हनुमते नमः — तांत्रिक हनुमत-मंत्र (दीक्षा-अपेक्षित)
ॐ श्री हनुमते नमः — खुला भक्ति-मंत्र (सर्व-सुलभ)
हनुमान चालीसा — तुलसीदास-रचित, सर्वाधिक प्रचलित खुला स्तोत्र
'फ्रौं' आन्ध्र, तेलंगाना और कर्नाटक के माधव-परम्परा के तांत्रिक हनुमत-लीनेज में प्रयुक्त होता है। विभिन्न तांत्रिक हनुमत-लीनेज हुं, फ्रेम, फ्रौं जैसे अलग-अलग बीजों का प्रयोग करते हैं।
जप कैसे करें
सर्वोत्तम समय
- मंगलवार और शनिवार — हनुमान जी के पावन दिन
- हनुमान जयंती — चैत्र पूर्णिमा
- ब्रह्म मुहूर्त — प्राण-साधना का सर्वोत्तम समय
- गुरु-निर्देशानुसार — दीक्षित साधकों के लिए
माला
Rudraksha
संख्या
१०८; रुद्राक्ष माला — गुरु-निर्देश के अनुसार
आसन
गुरु-निर्देशित आसन; सामान्यतः वज्रासन या वीरासन
तैयारी
केवल दीक्षित साधकों के लिए गुरु-निर्देशित विधि से। सामान्य भक्त के लिए: स्नान, लाल वस्त्र, सिंदूर-चर्चित हनुमान-चित्र।
Vaikhari
वाचिक
गुरु-निर्देशित विशेष अनुष्ठान में — दीक्षा के बाद
Upamsu
उपांशु
उन्नत तांत्रिक साधना की प्रमुख विधि — श्वास के साथ समन्वय
Manasika
मानसिक
उच्चतम स्तर — हनुमान के परम-वायु-स्वरूप का ध्यान करते हुए
इस अक्षर के बारे में
हनुमान-साधना के दो मुख्य मार्ग हैं: खुली भक्ति (ॐ श्री हनुमते नमः, हनुमान चालीसा) और उन्नत तांत्रिक साधना (फ्रौं बीज सहित)। तांत्रिक हनुमत-परम्परा विशेषतः दक्षिण भारत — आन्ध्र, तेलंगाना और कर्नाटक — में मजबूत है।
माधव-सम्प्रदाय में हनुमान वायु-देव के अवतार हैं। वायु-देव माधव-दर्शन के तीन प्रमुख तत्त्वों — मुख्यप्राण, भीम और हनुमान — में अवतरित हुए हैं।
'फ्रौं' उस वायु-शक्ति का बीज है जो समुद्र पार कर सकती है, लंका जला सकती है और संजीवनी-पर्वत उठा सकती है।
पारंपरिक उपयोग
तांत्रिक हनुमत-साधना — दीक्षित साधकों के लिए
उग्र शत्रु-निवारण और दुष्ट-शक्तियों से सुरक्षा
प्राण-शक्ति और शारीरिक बल का अभूतपूर्व विकास
गहन ध्यान और उन्नत वायु-साधना में
आधुनिक भारत में
आधुनिक जीवन में हनुमान-भक्ति लाखों लोगों के लिए शक्ति का स्रोत है। 'फ्रौं' तांत्रिक बीज के लिए दीक्षा चाहिए, परंतु हनुमान-चालीसा और 'ॐ श्री हनुमते नमः' बिना किसी शर्त के — किसी भी परिस्थिति में — हनुमान जी की कृपा दिलाते हैं।
दीक्षा आवश्यक
इस बीज के लिए संबंधित तांत्रिक हनुमत-लीनेज में गुरु-दीक्षा अनिवार्य है। सामान्य भक्तों के लिए 'ॐ श्री हनुमते नमः' और हनुमान चालीसा पूर्णतः शक्तिशाली और सर्वाधिक सुलभ मार्ग हैं।
प्रश्न
स्रोत
- · Parashara Samhita, Hanuman mantra-shastra sections
- · Hanumat Tantra
- · Atharvashirsha compositions on Hanuman
- · Andhra-Telangana Hanumat lineage texts
- · Madhva sampradaya Hanumat traditions
आधुनिक तांत्रिक 'फ्रौं' को मणिपूर चक्र से जोड़ते हैं क्योंकि हनुमान शक्ति, साहस और प्राण-ऊर्जा के देवता हैं। कुछ परम्पराएँ इसे वक्षस्थल से भी जोड़ती हैं — हनुमान के हृदय में राम का निवास।
किसी भी परंपरागत Hz (हर्ट्ज़) आवृत्ति का उल्लेख नहीं है। सॉल्फेजियो आवृत्ति के दावे आधुनिक न्यू-एज मान्यताएँ हैं, शास्त्रसम्मत नहीं।