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ॐ कमण्डलुधराय नमः

कमण्डलुधरः

Kamaṇḍaludhāraḥ

Root: kamaṇḍalu + dhāra

Liberation·मोक्ष
Meaning

अर्थ

The bearer of the water-pot, the renunciant who carries the kamandalu as his only vessel and possession

कमण्डलु धारण करने वाले, वह विरागी जो कमण्डलु को अपना एकमात्र पात्र और सम्पत्ति के रूप में धारण करते हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

कमण्डलु

the ascetic's water-pot

तपस्वी का जल-पात्र

धार

bearer, holder

धारक

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

कमण्डलुधार दत्तात्रेय के सबसे पहचानने योग्य प्रतिमा-शास्त्रीय गुणों में से एक है। कमण्डलु (हिन्दू और जैन तपस्वियों द्वारा धारित गोल तले का जल-पात्र) भौतिक सादगी और आध्यात्मिक बहुतायत दोनों का प्रतिनिधित्व करता है: एक छोटे से पात्र से ऋषि को जो चाहिए वह सब मिलता है। ब्रह्मा भी कमण्डलु धारण करते हैं और दत्तात्रेय की त्रिमूर्ति प्रतिमा-शास्त्र में कमण्डलु विशेष रूप से ब्रह्मा के सृजन-सिद्धान्त का प्रतिनिधित्व करता है। कमण्डलुधार के रूप में दत्तात्रेय सिखाते हैं कि दिव्यता को अलंकरण की आवश्यकता नहीं: एक पात्र पर्याप्त है।

When to Chant

कब जपें

Chant when meditating on simplicity and non-possession, during parivrajya (wandering ascetic life), or at the start of any fasting or purification ritual involving water.

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