ॐ सर्वभूतान्तरात्मने नमः
सर्वभूतान्तरात्मन्
Sarvabhūtāntarātmane
Root: sarva (all) + bhūta (being) + antara (inner) + ātman (self, soul)
अर्थ
The inner self dwelling within the heart of every living being
सभी प्राणियों के भीतर निवास करने वाली अन्तरात्मा, हर जीव में विद्यमान परमात्मा
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all
सभी
भूत
being, creature
प्राणी, जीव
अन्तर
inner, within
भीतर, अन्दर
आत्मन्
self, soul
आत्मा
आधुनिक संदर्भ
ईशावास्य उपनिषद कहता है 'ईशा वास्यमिदं सर्वम्', सब में ईश्वर बसता है। सर्वभूतान्तरात्मन् हनुमान हर प्राणी के हृदय में बैठे हैं। गली के कुत्ते में, पेड़ पर बैठे पक्षी में, और ऑफिस के सहकर्मी में, सबमें हनुमान हैं। जब किसी से नाराज़ हों तो याद रखें कि उसमें भी हनुमान बसे हैं। सर्व-जीव-दया का मूल यही भाव है।
कब जपें
ॐChant during meditation on universal consciousness, when cultivating compassion, or when anger toward others needs the reminder of shared divinity.
और मोक्ष नाम
← → arrow keys to navigate