ॐ सर्वात्मने नमः
सर्वात्मन्
Sarvātmane
Root: sarva (all) + ātman (self, soul)
अर्थ
The universal self dwelling within all beings
समस्त प्राणियों में विद्यमान परमात्मा, जो सबकी आत्मा में निवास करते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सभी, समस्त
आत्मन्
self, soul, essence
आत्मा, स्वयं
आधुनिक संदर्भ
हनुमान जी हर प्राणी में बसे हैं, चाहे गली का कुत्ता हो या मंदिर का पुजारी। जब गौशाला में गाय की सेवा करें, सड़क के जानवरों को खाना खिलाएँ, या वृद्धाश्रम में बुज़ुर्गों की सेवा करें, तो सर्वात्मन् का ध्यान रखें कि हर जीव में भगवान हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर यह भाव प्रकृति सेवा से जुड़ता है।
कब जपें
ॐChant when serving any living being, during environmental activities, or during meditation on the universal self. Ideal during Amavasya when compassion for all beings is emphasized.
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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