ॐ त्रिविक्रमाय नमः
त्रिविक्रमः
Trivikramaḥ
Root: tri + vikrama
अर्थ
He of three strides, who in Shiva's context strides across the three realms of earth, atmosphere, and heaven, claiming all existence as his domain with each cosmic step
तीन पगों वाले, जो शिव के संदर्भ में पृथ्वी, वायुमण्डल और स्वर्ग के तीन लोकों में कदम रखते हुए प्रत्येक ब्रह्माण्डीय पग से समस्त अस्तित्व को अपना क्षेत्र घोषित करते हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
त्रि
three
तीन
विक्रम
stride, step, heroic advance
विक्रम, पग, वीरतापूर्ण कदम
आधुनिक संदर्भ
त्रिविक्रम मुख्य रूप से विष्णु-वामन का नाम है जिनकी तीन ब्रह्माण्डीय गतियों ने समग्र ब्रह्माण्ड को माप लिया। रुद्र सहस्रनाम में इसका प्रकट होना एक स्पष्ट हरि-हर अभिसरण है: दोनों देवों को तीनों लोकों पर संप्रभुता के रूप में वर्णित किया जाता है। शिव की अपनी पुराण-कथा में तीन चरण अलग रूप में प्रकट होते हैं: उनकी तृतीय नेत्र की अग्नि त्रिपुर के तीनों नगरों को एक ही क्षण में भस्म करती है।
कब जपें
ॐChant to honour Shiva's sovereignty over the three worlds: the earthly (bhūrloka), the intermediate (bhuvarloka), and the heavenly (svarloka).
और ब्रह्माण्डीय व्यवस्था नाम
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