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ॐ पिनाकधृषे नमः

पिनाकधृक्

Pinākadhṛk

Root: pināka + dhṛk

Protection·रक्षा
Meaning

अर्थ

Bearer of the Pināka bow, the divine archer who carries the cosmic bow from which a single arrow can destroy entire worlds and restore the balance of dharma

पिनाक धनुष के धारक, वह दिव्य धनुर्धर जो उस ब्रह्माण्डीय धनुष को वहन करते हैं जिसके एक बाण से सम्पूर्ण जगत नष्ट हो सकते हैं और धर्म का संतुलन पुनः स्थापित हो सकता है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

पिनाक

Shiva's divine bow, the cosmic weapon

पिनाक, शिव का दिव्य धनुष

धृक्

bearer, holder, carrier

धारक, वहन करने वाला

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

पिनाकधृक् (पिनाक धनुष के धारक) शिव को उनके योद्धा आयाम में जागृत करता है। रामायण में यही पिनाक धनुष राजा जनक के दरबार में सीता के वर की परीक्षा के रूप में रखा था: वह धनुष जिसे कोई सामान्य वीर उठा नहीं सका, केवल राम ने उसे चढ़ाया और तोड़ा। पिनाक दिव्य शस्त्र-शक्ति का प्रतीक है जो तब तक निष्क्रिय रहती है जब तक धर्म को उसकी शक्ति की आवश्यकता न हो।

When to Chant

कब जपें

Chant to invoke Shiva as the cosmic archer whose Pināka bow is ever ready to strike down what threatens dharma, offering protection to devotees who call on him.

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