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ॐ प्रणवाय नमः

प्रणवः

Praṇavaḥ

Root: pra + nu

Creation·सृष्टि
Meaning

अर्थ

The Oṃkāra, the sacred syllable Oṃ which is Shiva's own primal vibration, the sound that contains the entire universe within its three-and-a-half mātrās

ओंकार, पवित्र अक्षर ओं जो शिव का अपना आदि कम्पन है, वह ध्वनि जो अपनी साढ़े तीन मात्राओं में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को समाहित करती है

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

प्रणव

the syllable Oṃ, the primal sound, the sacred vibration

प्रणव, ओंकार, आदि ध्वनि, पवित्र कम्पन

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

प्रणव (ओंकार) समग्र सहस्रनाम में सबसे गहरे नामों में से एक है: शिव केवल एक नाम से वर्णित नहीं हैं बल्कि उस आदि ध्वनि के साथ एकात्म हैं जिससे सभी नाम उत्पन्न होते हैं। माण्डूक्य उपनिषद पूरी तरह ओं (प्रणव) के विश्लेषण को समर्पित है। पालघाट के वैदिक संहिता गायकों से लेकर मुम्बई से मिनेसोटा तक के योग स्टूडियो में OM ध्यान तक, भारत की जप-परंपरा प्रणव-शिव के साथ एक निरंतर संलग्नता है। हर संस्कृत मंत्र ओं से शुरू होता है: सम्पूर्ण मंत्र उस ध्वनि में पहले से समाया है।

When to Chant

कब जपें

Chant while meditating on Oṃkāra, the pranava: Shiva as Praṇava is the living sound-body of the divine, the vibration from which all mantras, all speech, and all creation emerge.

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