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ॐ शिवानन्दसागराय नमः

शिवानन्दसागरः

Śivānandasāgaraḥ

Root: śiva + ānanda + sāgara

Liberation·मोक्ष
Meaning

अर्थ

Ocean of Shiva's bliss, the boundless reservoir of the specific joy that is Shiva's own nature, in whom all auspiciousness and bliss find their deepest and most inexhaustible source

शिव के आनन्द का सागर, उस विशिष्ट आनंद का असीम जलाशय जो शिव की अपनी प्रकृति है, जिनमें समस्त मंगलमयता और आनन्द अपना सबसे गहरा और सबसे अक्षय स्रोत पाते हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

शिव

auspicious, Shiva

शिव, मंगलमय

आनन्द

bliss, the supreme joy

आनन्द, परमसुख

सागर

ocean, the boundless reservoir

सागर, असीम भंडार

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

शिवानन्दसागर (शिव के आनन्द का सागर) बैच 7 का समापन नाम है, और यह बैच के उद्घाटन समूह का एक परिपूर्ण पूरक बनाता है: 391 पर शिवार्चनप्रिय (पूजा के प्रति प्रेम) और 420 पर शिवानन्दसागर एक भक्ति-चाप बनाते हैं। तीन-भाग का नाम इस समग्र सहस्रनाम के सार का संश्लेषण करता है: शिव (मंगलमय, दिव्य व्यक्तित्व), आनन्द (वह आनंद जो उनकी प्रकृति है), और सागर (वह सागर जो उस आनन्द की अक्षयता का वर्णन करता है)। शिवानन्दसागर इसलिए केवल एक नाम नहीं बल्कि आध्यात्मिक खोज का एक पूर्ण सारांश है।

When to Chant

कब जपें

Chant as the closing name of this batch, where Śivānandasāgara's triple compound (Shiva + bliss + ocean) gathers the three most essential qualities of the divine into a single inexhaustible name.

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