ॐ महासात्त्वताय नमः
महासात्त्वतः
Mahāsāttvataḥ
Root: mahā + sāttvata
अर्थ
The supremely sattvic, blazing with the mahā-sattva , the purest, most luminous quality of existence , the divine whose nature is the greatest possible sattvic excellence
परम सात्त्विक, महासत्त्व से दीप्त , अस्तित्व की सबसे शुद्ध, सबसे प्रकाशमान गुणवत्ता , वह दिव्य जिनकी प्रकृति सबसे बड़ी संभव सात्त्विक उत्कृष्टता है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
महा
great, supreme
महान, परम
सात्त्वत
sattvic, characterized by sattva (purity, luminosity, clarity)
सात्त्वत, सत्त्व से विशेषित (शुद्धता, प्रकाशमानता, स्पष्टता)
आधुनिक संदर्भ
महासात्त्वत (परम सात्त्विक) शिव को सत्त्व गुण गुणवत्ता के शीर्ष पर रखता है। सांख्य-योग दर्शन में, तीन गुण (तमस, रजस, सत्त्व) तीन मूलभूत गुणवत्ताएँ हैं। शिव तीनों गुणातीत (#213) भी हैं। महासात्त्वत इसलिए शिव को शर्तीय प्राणियों में सबसे सात्त्विक के रूप में नहीं बल्कि उस परातीत आधार के रूप में नामित करता है जिसकी ओर सत्त्व स्वयं संकेत करता है। भारत की सात्त्विक आहार परंपरा महासात्त्वत की गुणवत्ता की ओर आकांक्षा की व्यावहारिक अभिव्यक्तियाँ हैं।
कब जपें
ॐChant to invoke Shiva's mahā-sāttvic quality , the supreme clarity, purity, and luminosity that is the divine's own nature , as an aspiration for one's own practice.
और पवित्रता नाम
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