ॐ सर्वसाधुजनप्रियाय नमः
सर्वसाधुजनप्रिय
Sarvasādhujanapriya
Root: sarva + sādhu + jana + priya
अर्थ
He who is dear to all saintly and virtuous people
सम्पूर्ण साधुजनों (सज्जनों) के प्रिय, सब सत्पुरुषों के आराध्य
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सब
साधु
saint, virtuous person, good soul
साधु, सज्जन, सत्पुरुष
जन
people, persons
जन, लोग
प्रिय
dear, beloved
प्रिय
आधुनिक संदर्भ
गीता में कृष्ण कहते हैं 'परित्राणाय साधूनाम्' — साधुओं की रक्षा के लिए आता हूँ। सर्वसाधुजनप्रिय भगवान सज्जनों से विशेष प्रेम करते हैं। जब कोई ईमानदार IAS अफ़सर भ्रष्टाचार के बीच सीधा खड़ा रहे, जब शिक्षक बिना पैसे के बच्चों को पढ़ाए, जब डॉक्टर गरीब का मुफ़्त इलाज करे — वे साधुजन हैं और भगवान उनसे विशेष प्रेम करते हैं।
कब जपें
ॐChant when honouring virtuous people, during satsang, or when good character needs divine encouragement. Ideal during Guru Purnima and when the righteous seem unrewarded.
और करुणा नाम
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