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ॐ प्रियार्हाय नमः

प्रियार्हः

Priyārhaḥ

Root: priya + arha

Devotion·भक्ति
Meaning

अर्थ

He who deserves the most loving and precious offerings

जो सबसे प्रिय और बहुमूल्य अर्पण के योग्य हैं

Word-by-Word Breakdown

शब्द-दर-शब्द विश्लेषण

प्रिय

dear, beloved, precious

प्रिय, प्यारा

अर्ह

worthy, deserving

योग्य, पात्र

Modern Context

आधुनिक संदर्भ

तिरुपति में भक्त सोने के आभूषण, बाल, और लाखों रुपये का दान करते हैं। नाथद्वारा में श्रीनाथजी को हीरों का श्रृंगार होता है। प्रियार्ह भगवान वो हैं जो सबसे प्रिय वस्तु के भी पात्र हैं। लेकिन गीता बताती है कि पत्र, पुष्प, फल, जल भी प्रेम से अर्पित करो तो भगवान स्वीकार करते हैं। असली 'प्रिय अर्पण' धन नहीं, भाव है।

When to Chant

कब जपें

Chant when making offerings, during abhishek, at any temple donation, or when the heart wishes to give its best to the Lord.

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