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ॐ अर्हाय नमः
अर्हः
Arhaḥ
Root: arh
Devotion·भक्ति
Meaning
अर्थ
The supremely worthy one who deserves all worship
जो सम्पूर्ण पूजा और सम्मान के परम योग्य हैं
Word-by-Word Breakdown
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अर्ह
worthy, deserving, fit to receive
योग्य, पात्र, ग्रहण करने के लायक
Modern Context
आधुनिक संदर्भ
जैन धर्म में 'अर्हत्' (अरिहन्त) शब्द तीर्थंकरों के लिए प्रयुक्त होता है। विष्णु सहस्रनाम में 'अर्ह' बताता है कि भगवान विष्णु सबसे अधिक पूजा-योग्य हैं। भारत में मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर, हर जगह पूजा होती है। लेकिन अर्ह वो परम पात्र हैं जो हर प्रकार की पूजा के सबसे योग्य हैं। जिसे भी पूजो, वो अर्ह तक पहुँचती है।
When to Chant
कब जपें
ॐChant during formal worship, when reflecting on the nature of 'worthiness' in devotion, or during interfaith contemplation.
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