ॐ अक्षराय नमः
अक्षरम्
Akṣaram
Root: a + kṣar
अर्थ
The imperishable eternal reality that never changes or decays
अविनाशी शाश्वत सत्ता, जो कभी बदलती या क्षीण नहीं होती
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अक्षर
imperishable, indestructible, the syllable Om
अविनाशी, अक्षय, ओंकार
आधुनिक संदर्भ
पिछला नाम क्षर (नश्वर) था, यह नाम अक्षर (अविनाशी) है। गीता (15.16-17) में कृष्ण कहते हैं कि वे क्षर और अक्षर दोनों से परे 'पुरुषोत्तम' हैं। 'अक्षर' का एक अर्थ 'ॐ' भी है। मुण्डकोपनिषद कहता है 'अक्षरं ब्रह्म परमम्,' अक्षर (ॐ) ही परम ब्रह्म है। जब कोई ध्यान में 'ॐ' का जप करता है, वो अक्षर (अविनाशी) से जुड़ रहा है।
कब जपें
ॐChant during Om meditation, Gita Chapter 15 study, Mundaka Upanishad study, or when the Kshara-Akshara pair clarifies the relationship between the changing and the changeless.
और मोक्ष नाम
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