ॐ अजाय नमः
अजः
Ajaḥ
Root: a + jan
अर्थ
The eternally unborn one who transcends birth and death forever
शाश्वत अजन्मा, जो जन्म और मृत्यु से सदा परे हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अ
without
बिना
ज
born
जन्मा
आधुनिक संदर्भ
अज चौथी बार आया है (पहले नाम 95, 231, 376)। चार बार दोहराव अब इसे सत्य (4x), श्रीमान (4x), और अप्रमेयात्मा (4x) के बराबर रखता है। 'अजन्मा' होना भगवान का सबसे विलक्षण गुण है। हर प्राणी जन्मता है, हर तारा बनता है, हर सभ्यता शुरू होती है। लेकिन अज कभी शुरू नहीं हुए, सदा से हैं। चार बार कहना है: यह कोई दार्शनिक अवधारणा नहीं, यह ब्रह्माण्डीय सत्य है।
कब जपें
ॐChant during Gita Chapter 2 study, when the quadruple Aja creates its most powerful impact, during moksha-themed meditation, or when the unborn nature of God defies every temporal framework.
और मोक्ष नाम
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