ॐ सर्वयोगविनिःसृताय नमः
सर्वयोगविनिःसृतः
Sarvayogaviniḥsṛtaḥ
Root: sarva + yoga + viniḥsṛta
अर्थ
He attained through every path of sincere spiritual union
सभी योग-मार्गों से प्राप्त होने वाले, हर सच्चे मार्ग का गन्तव्य
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all
सब
योग
paths of union
योग-मार्ग
विनिःसृत
attained, realised
प्राप्त
आधुनिक संदर्भ
सर्वयोगविनिःसृत तीसरी बार आया है (पहले नाम 103 और 325)। तीन बार दोहराव इसे सहस्रनाम के सबसे 'समावेशी' (inclusive) नामों में रखता है। कोई भी मार्ग (भक्ति, ज्ञान, कर्म, राज-योग) सच्चा हो तो भगवान तक पहुँचाता है। ISKCON का भक्त, विपश्यना का ध्यानी, कर्म-योगी सामाजिक कार्यकर्ता, और वेदान्ती विद्वान, सब एक ही भगवान तक पहुँच रहे हैं। तीसरी बार = तीसरी बार आश्वासन।
कब जपें
ॐChant during interfaith/inter-path discussions, when spiritual confusion needs resolution, during the Gita's four-yoga study, or when inclusiveness IS the teaching.
और भक्ति नाम
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