ॐ वसवे नमः
वसुः
Vasuḥ
Root: vas
अर्थ
The indwelling treasure who resides within every being as divine wealth
हर प्राणी में निवास करने वाला दिव्य धन, आन्तरिक खज़ाना
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
वसु
wealth, dweller, treasure
धन, निवासी
आधुनिक संदर्भ
वसु तीसरी बार आया है (पहले नाम 104 और 326)। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' (पूरी पृथ्वी एक परिवार) इसी 'वसु' से बना है। तीन बार दोहराव दर्शाता है कि भगवान का हर प्राणी में निवास और धन-स्वरूप होना सहस्रनाम का केन्द्रीय सन्देश है। G20 समिट में भारत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' को अपना आदर्श वाक्य बनाया। तीसरी बार वसु = तीसरी बार 'सब में भगवान बसते हैं।'
कब जपें
ॐChant during Vasudhaiva Kutumbakam reflections, G20 discussions, when recognising divine presence in every person, or when the triple Vasu makes universal indwelling unmissable.
और समृद्धि नाम
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