ॐ अनन्तरूपाय नमः
अनन्तरूपः
Anantarūpaḥ
Root: ananta + rūpa
अर्थ
He of infinite forms, manifesting as everything visible and invisible
अनन्त रूपों वाले, जो हर दृश्य और अदृश्य वस्तु के रूप में प्रकट हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अनन्त
infinite, endless
अनन्त, असीमित
रूप
form, appearance
रूप
आधुनिक संदर्भ
गीता अध्याय 11 में अर्जुन विश्वरूप देखकर कहता है 'अनन्तरूपम्!' अनन्तरूप भगवान अनगिनत रूपों में प्रकट हैं: हर मनुष्य, हर पशु, हर पेड़, हर पत्थर, हर तारा। 'ईश्वर सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति' (गीता 18.61), भगवान हर प्राणी के हृदय में बैठे हैं। यह 33 करोड़ देवी-देवताओं का दार्शनिक आधार है: एक भगवान, अनन्त रूप।
कब जपें
ॐChant during Vishvarupa meditation, Gita Chapter 11, when diversity inspires rather than divides, or when the one-God-infinite-forms concept needs its most elegant expression.
और प्रेम नाम
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