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पूर्वखण्ड — आचारकाण्ड · अध्याय 30

श्रीधर (विष्णु) अर्चन-विधि

अध्याय 29अध्याय-सूचीअध्याय 31

श्लोक 1 (garuda.1.30.1)

।।सूत उवाच । विस्तरेण प्रवक्ष्यामि श्रीधरस्यार्चनं शुभम् । परिवारश्च सर्वेषां समोज्ञेयो हि पण्डितैः

sūta uvāca vistareṇa pravakṣyāmi śrīdharasyārcanaṁ śubham parivāraśca sarveṣāṁ samojñeyo hi paṇḍitaiḥ

सूत जी ने कहा — मैं विस्तार से श्रीधर की शुभ पूजा बताऊँगा। सभी देवताओं का परिवार पंडितों द्वारा समान रूप से जानने योग्य है।

श्लोक 2 (garuda.1.30.2)

ॐ श्रां हृदयाय नमः । ॐ श्रींशिरसे स्वाहा । ॐ श्रू शिखायै वषटू । ॐ श्रैं कवचाय हुं । ॐ श्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ श्रः अस्त्राय फट् इति

oṁ śrāṁ hṛdayāya namaḥ oṁ śrīṁśirase svāhā oṁ śrū śikhāyai vaṣaṭū oṁ śraiṁ kavacāya huṁ oṁ śrauṁ netratrayāya vauṣaṭ oṁ śraḥ astrāya phaṭ iti

'ॐ श्रां हृदय को नमस्कार। ॐ श्रीं शिर को स्वाहा। ॐ श्रूं शिखा को वषट्। ॐ श्रैं कवच को हुं। ॐ श्रौं नेत्रत्रय को वौषट्। ॐ श्रः अस्त्र को फट्' — इस प्रकार।

श्लोक 3 (garuda.1.30.3)

दर्शयेदात्मनो मुद्रां शङ्खचक्रगदादिकाम् । ध्यात्वात्मानं श्रीधराख्यं शङ्खचक्रगदाधरम्

darśayedātmano mudrāṁ śaṅkhacakragadādikām dhyātvātmānaṁ śrīdharākhyaṁ śaṅkhacakragadādharam

अपनी शंख, चक्र, गदा आदि की मुद्राएँ दिखाए। अपनी आत्मा का शंख-चक्र-गदाधारी श्रीधर के रूप में ध्यान करे।

श्लोक 4 (garuda.1.30.4)

ततस्तं पूजयेद्देवं मण्डले स्वस्तिकादिके । आसनं पूजयेदादौ देवदेवस्य शार्ङ्गिणः । एभिर्मन्त्रैर्महादेव तान्मत्राञ्छृणु शङ्कर

tatastaṁ pūjayeddevaṁ maṇḍale svastikādike āsanaṁ pūjayedādau devadevasya śārṅgiṇaḥ ebhirmantrairmahādeva tānmatrāñchṛṇu śaṅkara

तत्पश्चात् स्वस्तिक आदि मंडल में उस देवता की पूजा करे। पहले शार्ङ्गधारी देवदेव के आसन की पूजा करे। हे महादेव! हे शंकर! इन्हीं मंत्रों को सुनिए।

श्लोक 5 (garuda.1.30.5)

ॐ श्रीधरासनदेवताः आगच्छता । ॐ समस्तपरिवारायच्युतासनाय नमः

oṁ śrīdharāsanadevatāḥ āgacchatā oṁ samastaparivārāyacyutāsanāya namaḥ

'ॐ श्रीधर के आसन-देवता, पधारिए।' 'ॐ समस्त परिवार सहित अच्युत के आसन को नमस्कार।'

श्लोक 6 (garuda.1.30.6)

ॐ धात्रे नमः । ॐ विधात्रे नमः । ॐ गङ्गायै नमः । ॐ यमुनायै नमः । ॐ आधारशक्तयै नमः । ॐ कूर्म्माय नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ पृथिव्यै नमः । ॐ धर्म्माय नमः । ॐ ज्ञानाय नमः । ॐ वैराग्याय नमः । ॐ ऐश्वर्य्याय नमः । ॐ अधर्म्माय नमः । ॐ अज्ञानाय नमः । ॐ अवैराग्याय नमः । ॐ अनैश्वर्य्याय नमः । ॐ कन्दाय नमः । ॐ नालाय नमः । ॐ पद्माय नमः । ॐ विमलायै नमः । ॐ उत्कर्षिण्यै नमः । ॐ ज्ञानायै नमः । ॐ क्रियायै नमः । ॐ योगायै नमः । ॐ प्रह्व्यै नमः । ॐ सत्यायै नमः । ॐ ईशानायै नमः । ॐ अनुग्रहायै नमः

oṁ dhātre namaḥ oṁ vidhātre namaḥ oṁ gaṅgāyai namaḥ oṁ yamunāyai namaḥ oṁ ādhāraśaktayai namaḥ oṁ kūrmmāya namaḥ oṁ anantāya namaḥ oṁ pṛthivyai namaḥ oṁ dharmmāya namaḥ oṁ jñānāya namaḥ oṁ vairāgyāya namaḥ oṁ aiśvaryyāya namaḥ oṁ adharmmāya namaḥ oṁ ajñānāya namaḥ oṁ avairāgyāya namaḥ oṁ anaiśvaryyāya namaḥ oṁ kandāya namaḥ oṁ nālāya namaḥ oṁ padmāya namaḥ oṁ vimalāyai namaḥ oṁ utkarṣiṇyai namaḥ oṁ jñānāyai namaḥ oṁ kriyāyai namaḥ oṁ yogāyai namaḥ oṁ prahvyai namaḥ oṁ satyāyai namaḥ oṁ īśānāyai namaḥ oṁ anugrahāyai namaḥ

'ॐ धाता को नमस्कार। ॐ विधाता को नमस्कार। ॐ गंगा को नमस्कार। ॐ यमुना को नमस्कार। ॐ आधारशक्ति को नमस्कार। ॐ कूर्म को नमस्कार। ॐ अनंत को नमस्कार। ॐ पृथ्वी को नमस्कार। ॐ धर्म को नमस्कार। ॐ ज्ञान को नमस्कार। ॐ वैराग्य को नमस्कार। ॐ ऐश्वर्य को नमस्कार। ॐ अधर्म को नमस्कार। ॐ अज्ञान को नमस्कार। ॐ अवैराग्य को नमस्कार। ॐ अनैश्वर्य को नमस्कार। ॐ कंद को नमस्कार। ॐ नाल को नमस्कार। ॐ पद्म को नमस्कार। ॐ विमला को नमस्कार। ॐ उत्कर्षिणी को नमस्कार। ॐ ज्ञान-शक्ति को नमस्कार। ॐ क्रिया को नमस्कार। ॐ योग को नमस्कार। ॐ प्रह्वी को नमस्कार। ॐ सत्या को नमस्कार। ॐ ईशाना को नमस्कार। ॐ अनुग्रहा को नमस्कार।'

श्लोक 7 (garuda.1.30.7)

अर्चयित्वा समं रुद्र हरिमावाह्य संयजेत् । मन्त्रैरेभिर्महाप्राज्ञः सर्वपापप्रणाशनैः

arcayitvā samaṁ rudra harimāvāhya saṁyajet mantrairebhirmahāprājñaḥ sarvapāpapraṇāśanaiḥ

हे रुद्र! इस प्रकार समान रूप से पूजा कर, हरि का आवाहन कर, महाप्राज्ञ इन्हीं समस्त पापों का नाश करने वाले मंत्रों से भलीभाँति यजन करे।

श्लोक 8 (garuda.1.30.8)

ॐ ह्रीं श्रीधराय त्रैलोक्यमोहनाय विष्णवे नमः आगच्छ

oṁ hrīṁ śrīdharāya trailokyamohanāya viṣṇave namaḥ āgaccha

'ॐ ह्रीं, त्रैलोक्य को मोहित करने वाले विष्णु श्रीधर को नमस्कार — पधारिए।'

श्लोक 9 (garuda.1.30.9)

ॐ श्रियै नमः । ऊँ श्रां हृदयाय नमः । ॐ श्रीं शिरसे नमः । ॐ श्रूं शिखायै नमः । ॐ श्रैं कवचाय नमः । ॐ श्रौं नेत्रत्रयाय नमः । ॐ श्रः अस्त्राय नमः । ॐ शङ्खाय नमः । ॐ पद्माय नमः । ॐ चक्राय नमः । ॐ गदायै नमः । ॐ श्री वत्साय नमः । ॐ कौस्तुभ्यै नमः । ॐ वनमालायै नमः । ॐ पीताम्बराय नमः । ॐ ब्रह्मणे नमः । ॐ नारदाय नमः । ॐ गुरुभ्यो नमः । ॐ इन्द्राय नमः । ॐ अग्नये नमः । ॐ यमाय नमः । ॐ निर्ऋतये नमः । ॐ वरुणाय नमः । ॐ वायवे नमः । ॐ सोमाय नमः । ॐ ईशानाय नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ ब्रह्मणे नमः । ॐ सत्त्वाय नमः । ॐ रजसे नमः । ॐ तमसे नमः । ॐ विष्वक्सेनाय नमः

oṁ śriyai namaḥ ū̃ śrāṁ hṛdayāya namaḥ oṁ śrīṁ śirase namaḥ oṁ śrūṁ śikhāyai namaḥ oṁ śraiṁ kavacāya namaḥ oṁ śrauṁ netratrayāya namaḥ oṁ śraḥ astrāya namaḥ oṁ śaṅkhāya namaḥ oṁ padmāya namaḥ oṁ cakrāya namaḥ oṁ gadāyai namaḥ oṁ śrī vatsāya namaḥ oṁ kaustubhyai namaḥ oṁ vanamālāyai namaḥ oṁ pītāmbarāya namaḥ oṁ brahmaṇe namaḥ oṁ nāradāya namaḥ oṁ gurubhyo namaḥ oṁ indrāya namaḥ oṁ agnaye namaḥ oṁ yamāya namaḥ oṁ nirṛtaye namaḥ oṁ varuṇāya namaḥ oṁ vāyave namaḥ oṁ somāya namaḥ oṁ īśānāya namaḥ oṁ anantāya namaḥ oṁ brahmaṇe namaḥ oṁ sattvāya namaḥ oṁ rajase namaḥ oṁ tamase namaḥ oṁ viṣvaksenāya namaḥ

'ॐ श्री को नमस्कार। ॐ श्रां हृदय को नमस्कार। ॐ श्रीं शिर को नमस्कार। ॐ श्रूं शिखा को नमस्कार। ॐ श्रैं कवच को नमस्कार। ॐ श्रौं नेत्रत्रय को नमस्कार। ॐ श्रः अस्त्र को नमस्कार। ॐ शंख को नमस्कार। ॐ पद्म को नमस्कार। ॐ चक्र को नमस्कार। ॐ गदा को नमस्कार। ॐ श्रीवत्स को नमस्कार। ॐ कौस्तुभ को नमस्कार। ॐ वनमाला को नमस्कार। ॐ पीतांबर को नमस्कार। ॐ ब्रह्मा को नमस्कार। ॐ नारद को नमस्कार। ॐ गुरुओं को नमस्कार। ॐ इंद्र को नमस्कार। ॐ अग्नि को नमस्कार। ॐ यम को नमस्कार। ॐ निर्ऋति को नमस्कार। ॐ वरुण को नमस्कार। ॐ वायु को नमस्कार। ॐ सोम को नमस्कार। ॐ ईशान को नमस्कार। ॐ अनंत को नमस्कार। ॐ ब्रह्म को नमस्कार। ॐ सत्त्व को नमस्कार। ॐ रजस् को नमस्कार। ॐ तमस् को नमस्कार। ॐ विष्वक्सेन को नमस्कार।'

श्लोक 10 (garuda.1.30.10)

अभिषेकं तथा वस्त्रं ततो यज्ञोपवीतकम् । गन्धं पुष्पं तथा धूपं दीपमन्नं प्रदक्षिणम्

abhiṣekaṁ tathā vastraṁ tato yajñopavītakam gandhaṁ puṣpaṁ tathā dhūpaṁ dīpamannaṁ pradakṣiṇam

अभिषेक, तत्पश्चात् वस्त्र, फिर यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, अन्न, और प्रदक्षिणा —

श्लोक 11 (garuda.1.30.11)

दद्यादेभिर्महामन्त्रैः समप्यार्थ जपेन्मनुम् । शतमष्टोत्तरं चापि जप्त्वा ह्यथ समर्पयेत्

dadyādebhirmahāmantraiḥ samapyārtha japenmanum śatamaṣṭottaraṁ cāpi japtvā hyatha samarpayet

इन्हीं महामंत्रों से अर्पित करे, और मंत्र का जप करे। एक सौ आठ बार जप कर, तत्पश्चात् समर्पण करे।

श्लोक 12 (garuda.1.30.12)

ततो मुहूर्त्तमेकन्तुध्यायेद्देवं हृदि स्थितम् । शुद्धस्फटिकसंकाशं सूर्य्यकोटिसमप्रभम्

tato muhūrttamekantudhyāyeddevaṁ hṛdi sthitam śuddhasphaṭikasaṁkāśaṁ sūryyakoṭisamaprabham

तत्पश्चात् एक मुहूर्त तक हृदय में स्थित देवता का ध्यान करे, जो शुद्ध स्फटिक के समान और करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी हैं।

श्लोक 13 (garuda.1.30.13)

प्रसन्नवदनं सौम्यं स्फुरन्मकरकुण्डलम् । किरीटिनमुदाराङ्गं वनमालासमन्वितम्

prasannavadanaṁ saumyaṁ sphuranmakarakuṇḍalam kirīṭinamudārāṅgaṁ vanamālāsamanvitam

प्रसन्न मुख वाले, सौम्य, चमकते मकर-कुंडल पहने हुए, मुकुटधारी, उदार अंगों वाले, वनमाला से सुशोभित,

श्लोक 14 (garuda.1.30.14)

परब्रह्मस्वरूपं च श्रीधरं चिन्तयेत्सुधीः । अनेन चैव स्तोत्रेण स्तुवीत परमेश्वरम्

parabrahmasvarūpaṁ ca śrīdharaṁ cintayetsudhīḥ anena caiva stotreṇa stuvīta parameśvaram

परब्रह्म-स्वरूप श्रीधर का बुद्धिमान व्यक्ति चिंतन करे। इसी स्तोत्र से परमेश्वर की स्तुति करे।

श्लोक 15 (garuda.1.30.15)

श्रीनिवासाय देवाय नमः श्रीपतये नमः । श्रीधराय सशार्ङ्गाय श्रीप्रदाय नमोनमः

śrīnivāsāya devāya namaḥ śrīpataye namaḥ śrīdharāya saśārṅgāya śrīpradāya namonamaḥ

'श्रीनिवास देव को नमस्कार, श्रीपति को नमस्कार। शार्ङ्गधारी श्रीधर को, श्री प्रदान करने वाले को बारंबार नमस्कार।'

श्लोक 16 (garuda.1.30.16)

श्रीवल्लभाय शान्ताय श्रीमते च नमोनमः । श्रीपर्वतनिवासाय नमः श्रेयस्कराय च

śrīvallabhāya śāntāya śrīmate ca namonamaḥ śrīparvatanivāsāya namaḥ śreyaskarāya ca

'श्री के प्रिय, शांत, श्रीमान को बारंबार नमस्कार। श्रीपर्वत में निवास करने वाले को नमस्कार, कल्याण करने वाले को भी।'

श्लोक 17 (garuda.1.30.17)

श्रेयसां पतये चैव ह्याश्रमाय नमोनमः । नमः श्रेयः स्वरूपाय श्रीकराय नमोनमः

śreyasāṁ pataye caiva hyāśramāya namonamaḥ namaḥ śreyaḥ svarūpāya śrīkarāya namonamaḥ

'कल्याणों के स्वामी को, आश्रम-स्वरूप को बारंबार नमस्कार। कल्याण-स्वरूप को नमस्कार, श्री करने वाले को बारंबार नमस्कार।'

श्लोक 18 (garuda.1.30.18)

शरण्याय वरेण्याय नमो भूयो नमोनमः । स्तोत्रं कृत्वा नमस्कृत्य देवदेवं विसर्जयेत्

śaraṇyāya vareṇyāya namo bhūyo namonamaḥ stotraṁ kṛtvā namaskṛtya devadevaṁ visarjayet

'शरण देने योग्य, वरणीय को बारंबार नमस्कार, नमस्कार।' स्तोत्र कर, नमस्कार कर देवदेव का विसर्जन करे।

श्लोक 19 (garuda.1.30.19)

इति रुद्रं समाख्यातां पूजां विष्णोर्महात्मनः । यः करोति महाभक्त्या स याति परमं पदम्

iti rudraṁ samākhyātāṁ pūjāṁ viṣṇormahātmanaḥ yaḥ karoti mahābhaktyā sa yāti paramaṁ padam

इस प्रकार रुद्र को महात्मा विष्णु की यह पूजा बताई गई। जो इसे महाभक्ति से करता है, वह परम पद को प्राप्त करता है।

श्लोक 20 (garuda.1.30.20)

यः पठतेऽध्यायं विष्णुपूजाप्रकाशकम् । स विधूयेत पापानि याति विष्णोः परं पदम्

yaḥ paṭhate'dhyāyaṁ viṣṇupūjāprakāśakam sa vidhūyeta pāpāni yāti viṣṇoḥ paraṁ padam

जो इस विष्णु-पूजा को प्रकाशित करने वाले अध्याय को पढ़ता है, वह अपने पापों को धोकर विष्णु के परम पद को प्राप्त करता है।

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