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प्रभास खण्ड · अध्याय 178

भार्गवेश्वरमाहात्म्यवर्णनम्

अध्याय 177अध्याय-सूचीअध्याय 179

श्लोक 1 (skanda.7.178.1)

ततो गच्छेन्महादेवि तस्माद्दक्षिणतः स्थितम्। भार्गवेश्वरनामानं सर्वपापप्रणाशनम्

tato gacchenmahādevi tasmāddakṣiṇataḥ sthitam| bhārgaveśvaranāmānaṁ sarvapāpapraṇāśanam

इसके पश्चात् हे महादेवि, उससे दक्षिण दिशा में स्थित, भार्गवेश्वर नामक तथा समस्त पापों का नाश करने वाले लिंग के पास जाना चाहिए।

श्लोक 2 (skanda.7.178.2)

यस्तं पूजयते देवि दिव्यपुष्पोपहारकैः। स भवेत्कृतकृत्यस्तु सर्वकामैः समृद्धिमान्

yastaṁ pūjayate devi divyapuṣpopahārakaiḥ| sa bhavetkṛtakṛtyastu sarvakāmaiḥ samṛddhimān

हे देवि, जो कोई दिव्य पुष्पों के उपहार से उसकी पूजा करता है, वह कृतकृत्य होकर समस्त कामनाओं से समृद्धिमान् होता है।

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