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प्रभास खण्ड · अध्याय 210

पुलस्त्येश्वरमाहात्म्यवर्णनम्

अध्याय 209अध्याय-सूचीअध्याय 211

श्लोक 1 (skanda.7.210.1)

ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि पुलस्त्येश्वरमुत्तमम्। मार्कंडेयोत्तेरे भागे धनुषां पञ्चके स्थितम्

īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi pulastyeśvaramuttamam| mārkaṇḍeyottare bhāge dhanuṣāṁ pañcake sthitam

ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, तत्पश्चात् उत्तम पुलस्त्येश्वर के पास जाना चाहिए, जो मार्कण्डेश्वर से उत्तर दिशा में पाँच धनुष की दूरी पर स्थित है।

श्लोक 2 (skanda.7.210.2)

तं दृष्ट्वा मानवो देवि पूजयित्वा विधानतः। सप्तजन्मार्जितात्पापान्मुच्यते नात्र संशयः

taṁ dṛṣṭvā mānavo devi pūjayitvā vidhānataḥ| saptajanmārjitātpāpānmucyate nātra saṁśayaḥ

हे देवि, उसका दर्शन कर तथा विधिपूर्वक पूजा करके मनुष्य सात जन्मों में अर्जित पापों से मुक्त हो जाता है, इसमें संशय नहीं है।

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