प्रभास खण्ड · अध्याय 228
भैरवेश्वरमातृगणमाहात्म्यवर्णनम्
श्लोक 1 (skanda.7.228.1)
ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि मातृस्थानमनुत्तमम्। भैरवेशेति विख्यातं सर्वभयविनाशनम्
īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi mātṛsthānamanuttamam| bhairaveśeti vikhyātaṁ sarvabhayavināśanam
ईश्वर ने कहा—हे महादेवि, तत्पश्चात् मातृकाओं के उस सर्वोत्तम स्थान के पास जाना चाहिए, जो भैरवेश नाम से विख्यात तथा समस्त भय का नाश करने वाला है।
श्लोक 2 (skanda.7.228.2)
चतुर्दश्यां विधानेन कृष्णपक्षे यतात्मवान्। पूजयेद्गन्धपुष्पैश्च बलिदानैस्तथोत्तमैः
caturdaśyāṁ vidhānena kṛṣṇapakṣe yatātmavān| pūjayedgandhapuṣpaiśca balidānaistathottamaiḥ
कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को संयमी होकर विधिपूर्वक गन्ध-पुष्पों से तथा उत्तम बलिदानों से उनकी पूजा करनी चाहिए।
श्लोक 3 (skanda.7.228.3)
तं पुत्रमिव योगिन्यो रक्षंति भुवि मातरः
taṁ putramiva yoginyo rakṣaṁti bhuvi mātaraḥ
योगिनियाँ और मातृकाएँ पृथ्वी पर उसकी रक्षा अपने पुत्र के समान करती हैं।