प्रभास खण्ड · अध्याय 253
गुफेश्वर माहात्म्य वर्णन
श्लोक 1 (skanda.7.253.1)
ईश्वर उवाच। ततो गच्छेन्महादेवि गुफेश्वरमनुत्तमम्। हिरण्या उत्तरे भागे सर्वपातकनाशनम्। तं दृष्ट्वा मानवो देवि कोटिहत्यां व्यपोहति
īśvara uvāca| tato gacchenmahādevi gupheśvaramanuttamam| hiraṇyā uttare bhāge sarvapātakanāśanam| taṁ dṛṣṭvā mānavo devi koṭihatyāṁ vyapohati
ईश्वर ने कहा—हे महादेवी, इसके पश्चात् उस सर्वोत्तम गुफेश्वर के पास जाना चाहिए, जो हिरण्या के उत्तर भाग में स्थित हैं और समस्त पापों का नाश करने वाले हैं। हे देवी, उनका दर्शन करने वाला मनुष्य करोड़ हत्याओं के पाप को भी दूर कर देता है।