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महालक्ष्मीbeej mula mantra deviखुली साधना~9 108× के लिए मिनट

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

Oṃ Śrīṃ Mahālakṣmyai Namaḥ

Om Shreem Mahalakshmyai Namah

साझा

महालक्ष्मी · Mahālakṣmī, the supreme Lakshmi, seated on a lotus, holding two lotuses in her hands, with elephants bathing her with water from golden pots; the consort of Vishnu, the goddess of prosperity in its widest sense, material, vital, intellectual, and spiritual

अर्थ

"Om. Through the seed syllable Śrīṃ, I bow to Mahalakshmi, the great goddess of prosperity, beauty, and the auspicious grace that nourishes all life."

ॐ। श्रीं बीज द्वारा मैं महालक्ष्मी को नमन करता हूँ, समस्त सम्पन्नता, सौन्दर्य और मांगल्य की महादेवी को।

शब्द दर शब्द

Oṃ

ब्रह्म का आदि नाद

The primordial sound

श्रीं
Śrīṃ

लक्ष्मी का बीज मन्त्र, समस्त मांगल्य, सम्पन्नता और दिव्य कृपा का बीज

The Lakshmi beej; the seed syllable of all auspiciousness, abundance, and divine grace; the sound from which Sri herself is held to emerge

महालक्ष्म्यै
Mahālakṣmyai

महालक्ष्मी को, महान् लक्ष्मी, सम्पन्नता और दिव्य कृपा की देवी

To Mahalakshmi (dative case), the great Lakshmi; mahā = great, lakṣmī = the goddess of prosperity, beauty, and grace

नमः
Namaḥ

नमस्कार, समर्पण

Salutation, bowing, surrender

अष्टलक्ष्मी

हिन्दू परम्परा सावधानी से समझाती है कि लक्ष्मी का अर्थ क्या है। वे केवल धन की देवी नहीं, वे श्री की देवी हैं, जीवन के समस्त मंगल की देवी, जिसमें धन एक अंग है। अष्टलक्ष्मी परम्परा आठ रूप गिनाती है: आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, वीर/धैर्य लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, और विद्या लक्ष्मी। श्रीं बीज द्वारा महालक्ष्मी का आह्वान केवल धन का नहीं, सम्पूर्ण समृद्धि का आह्वान है।

जप कैसे करें

सर्वोत्तम समय

  • दीपावली — महालक्ष्मी पूजा का सर्वोच्च पर्व
  • शुक्रवार — देवी का विशेष दिन; प्रत्येक शुक्रवार जप अत्यंत फलदायी
  • शरद पूर्णिमा — कोजागरी पूजा; रात्रि में माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं
  • नवरात्रि — विशेषतः महालक्ष्मी नवरात्रि में
  • एकादशी — भगवान विष्णु के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा का पावन दिन

माला

Sphatika (crystal) · Kamal Gatta (lotus seeds), Gold-thread sphatika

संख्या

१०८; विशेष अनुष्ठानों में १ से ३ माला प्रतिदिन

आसन

पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पद्मासन या सुखासन में बैठें।

तैयारी

स्नान करके पीले या लाल वस्त्र धारण करें। महालक्ष्मी की मूर्ति या चित्र सामने रखें। कमल-पुष्प, पीले गेंदे या गुलाब अर्पित करें। धूप, दीप और नैवेद्य में खीर या मिठाई रखें।

Vaikhari

वाचिक

मध्यम स्वर में स्पष्ट उच्चारण के साथ जप — समूह-पूजा और प्रारंभिक साधकों के लिए उपयुक्त।

Upamsu

उपांशु

अत्यंत मृदु, केवल होठों की हलचल के साथ — व्यक्तिगत ध्यान और एकांत साधना के लिए उत्तम।

Manasika

मानसिक

पूर्णतः मन के भीतर, बाहरी चेष्टा रहित — माँ के कमल-चरणों का ध्यान करते हुए जप करें।

१०८ जप में लगभग 9 मिनट लगते हैं

108× जप ऑडियो

पूर्ण-लंबाई ऑडियो — जल्द ही ऐप और वेब पर।

इस मंत्र के बारे में

'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' — इस मंत्र में 'श्रीं' एक बीज-मंत्र है जो श्री-शक्ति का सार है। 'श्री' शब्द केवल सम्पत्ति का नहीं, अपितु सम्पूर्ण ऐश्वर्य का — ज्ञान, सौंदर्य, यश, शक्ति, वैराग्य और मुक्ति — का द्योतक है। वेदों में श्री सूक्त (ऋग्वेद, मण्डल ५ का खिल) में देवी के इस सर्वांगीण रूप का वर्णन है।

श्री-वैष्णव परम्परा में माँ लक्ष्मी 'पुरुषकारभूता' हैं — वे भगवान विष्णु के समक्ष भक्त की ओर से मध्यस्थता करती हैं। जैसे एक माँ अपने बच्चे की गलतियाँ पिता से छुपाती है, वैसे ही माँ लक्ष्मी भक्त के दोषों को क्षमा दिलाती हैं। रामानुजाचार्य ने इसे शरणागति की नींव माना।

आदि शंकराचार्य ने कनकधारा स्तोत्र में देवी लक्ष्मी से एक निर्धन ब्राह्मण स्त्री के घर स्वर्ण-आम्र-फल की वर्षा करवाई — यह कथा मंत्र की अपार करुणा-शक्ति का प्रमाण है। देवी ने स्वयं कहा कि वे उसी के घर वास करती हैं जहाँ विष्णु-भक्ति और दान का भाव हो।

मूल

स्रोत
Sri Sukta, the 15-verse hymn appended to the Rig Veda (Khila section of Mandala 5)
परंपरा
Universal across all Hindu sampradāyas. Particularly central to Vaishnava traditions where Lakshmi is Vishnu's eternal consort. Sri Vaishnava theology elevates Lakshmi to the position of mediator (puruṣakāra) between the soul and Vishnu.
प्राचीनता
~3,000 वर्ष
में भी संदर्भित
  • · Lakshmi Tantra, one of the principal Pañcarātra texts
  • · Lakshmi Sahasranama
  • · Vishnu Purana, Lakshmi's emergence from the churning of the milk ocean
  • · Padma Purana
  • · Ashtalakshmi Stotra
  • · Kanakadhara Stotra, Adi Shankaracharya's hymn to Lakshmi

पारंपरिक लाभ

  • भगवती महालक्ष्मी की कृपा से धन, समृद्धि और भौतिक सम्पन्नता का आगमन होता है
  • श्रीं बीज के जप से आन्तरिक सौन्दर्य, करुणा और आकर्षण-शक्ति का विकास होता है
  • अष्टलक्ष्मी के आठों रूपों की कृपा से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता मिलती है
  • दारिद्र्य, ऋण और आर्थिक कठिनाइयों का नाश होता है
  • पुरुषकार के रूप में माँ लक्ष्मी भक्त के लिए भगवान विष्णु से कृपा-याचना करती हैं
  • गृहस्थ जीवन में शांति, प्रेम, संतान-सुख और सर्व-मंगल की प्राप्ति होती है

ये परंपरागत आध्यात्मिक मान्यताएँ हैं। यह मंत्र-जप आत्म-शुद्धि और भक्ति के लिए है — यह वित्तीय सलाह या चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है।

रोजमर्रा के भारत में यह मंत्र

आर्थिक कठिनाइयों, कर्ज और नौकरी की अनिश्चितता के इस युग में यह मंत्र लाखों लोगों के लिए आस्था का सहारा है। परंतु परम्परा यह भी कहती है कि माँ लक्ष्मी चंचला हैं — वे वहीं टिकती हैं जहाँ परिश्रम, ईमानदारी और देने का भाव हो। मंत्र-जप के साथ-साथ सत्कर्म, दान और कृतज्ञता भी उतनी ही आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

स्रोत और ईमानदारी

  • · Sri Sukta (Rig Veda khila section, Mandala 5)
  • · Lakshmi Tantra (Pañcarātra)
  • · Lakshmi Sahasranama
  • · Vishnu Purana
  • · Padma Purana
  • · Kanakadhara Stotra, Adi Shankaracharya
  • · Ashtalakshmi Stotra

किसी भी परंपरागत Hz (हर्ट्ज़) आवृत्ति का उल्लेख नहीं है। सॉल्फेजियो आवृत्ति के दावे आधुनिक न्यू-एज मान्यताएँ हैं, शास्त्रसम्मत नहीं।

कुछ आधुनिक तांत्रिक संदर्भों में श्रीं को अनाहत (हृदय) चक्र से जोड़ा जाता है — कृपा और सौंदर्य से उसके संबंध के कारण। लक्ष्मी का सर्वाधिक पवित्र यंत्र श्री यंत्र, शास्त्रीय श्री विद्या में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का ज्यामितीय मानचित्र माना जाता है, न कि किसी एक चक्र का। शास्त्रीय लक्ष्मी साधना मंत्र को श्री और दान की दृष्टि से देखती है, न कि चक्र-रचना की दृष्टि से।