ॐ निर्द्वन्द्वाय नमः
निर्द्वन्द्वः
Nirdvandvaḥ
Root: nir + dvandva
अर्थ
The one beyond the pairs of opposites, who is unaffected by pleasure and pain, praise and blame, success and failure, heat and cold
द्वन्द्वों से परे, जो सुख-दुःख, प्रशंसा-निन्दा, सफलता-विफलता, गर्मी-ठण्ड से अप्रभावित हैं
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
निर्
without, beyond
बिना
द्वन्द्व
pair of opposites, duality
द्वन्द्व, विपरीतों का जोड़ा
आधुनिक संदर्भ
निर्द्वन्द्व दत्तात्रेय को सभी द्वन्द्वों (विपरीतों के जोड़ों) से मुक्त नाम देता है। भगवद्गीता विशेष रूप से अर्जुन को द्वन्द्वों का अतिक्रमण करने का निर्देश देती है: 'विपरीतों के जोड़ों से मुक्त रहो' (2.45)। दत्तात्रेय का भ्रमण जीवन सबसे मूलगामी द्वन्द्व-परीक्षण है। भारत की प्रदर्शन संस्कृति में जहाँ सोशल मीडिया ने प्रशंसा की खुशी और आलोचना के दर्द को अभूतपूर्व स्तरों तक बढ़ाया है, निर्द्वन्द्व दत्तात्रेय समता की स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।
कब जपें
ॐChant when the mind is caught in the swing between pleasure and pain, praise and blame, or any other pair of opposites, invoking the dvandva-transcendence of the avadhuta.
और मोक्ष नाम
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