ॐ सर्वाङ्गशोभनाय नमः
सर्वाङ्गशोभनः
Sarvāṅgaśobhanaḥ
Root: sarva + aṅga + śobhana
अर्थ
Beautiful in every limb, whose entire divine form , from the crescent moon to the sacred ash, from the serpent ornaments to the trident , radiates a beauty that transforms the beholder
सभी अंगों में सुंदर, जिनका सम्पूर्ण दिव्य रूप , अर्धचन्द्र से लेकर पवित्र भस्म तक, सर्प-आभूषणों से लेकर त्रिशूल तक , वह सौंदर्य विकिरण करता है जो दर्शनकर्ता को बदल देता है
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
सर्व
all, every
सर्व, सभी
अङ्ग
limb, body-part, constituent element
अंग, शरीर-भाग
शोभन
beautiful, radiant, splendid
शोभन, सुंदर, दीप्तिमान
आधुनिक संदर्भ
सर्वांगशोभन (सभी अंगों में सुंदर) वह नाम है जो भक्त को स्वयं एक आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में शिव की प्रतिमाशास्त्रीय सुंदरता में आमंत्रित करता है। रूपध्यान (दिव्य रूप पर ध्यान) की परंपरा भारत की सबसे परिष्कृत अभ्यासों में से एक है: शिव के रूप का प्रत्येक तत्त्व अर्थ वहन करता है। अर्धचंद्र, जटाओं में गंगा, तृतीय नेत्र, भस्म, सर्प, नंदी: ये सभी तत्त्व सर्वांगशोभन के रूप में चिंतन किए जाने पर एक पूर्ण दीक्षा-शिक्षा बनाते हैं।
कब जपें
ॐChant during dhyāna (meditation) on Shiva's form, contemplating each element of his iconography as a teaching and each limb as radiating transformative beauty.
और भक्ति नाम
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