ॐ अनिर्देश्यवपुषे नमः
अनिर्देश्यवपुः
Anirdeśyavapuḥ
Root: a + nirdeśya + vapu
अर्थ
He whose divine form transcends all human description
जिनका दिव्य रूप किसी भी वर्णन से परे है, अवर्णनीय स्वरूप
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
अनिर्देश्य
indescribable, beyond definition
वर्णन से परे
वपु
form, body
रूप, शरीर
आधुनिक संदर्भ
अनिर्देश्यवपु दूसरी बार आया है (पहली बार नाम 176)। गीता अध्याय 11 में अर्जुन विराट रूप देखकर कहता है 'न तु मां शक्यसे द्रष्टुम्,' तुम मुझे सामान्य आँखों से नहीं देख सकते। फ़ोटोग्राफ़ी, VR, AI इमेज-जनरेशन, कोई तकनीक भगवान के असली रूप को capture नहीं कर सकती। दोहराव कहता है: भगवान को 'दिखाने' की कोशिश बार-बार करो, पर जानो कि पूरा कभी नहीं दिख सकता।
कब जपें
ॐChant during nirguna (formless) meditation, when artistic depictions feel incomplete, during Gita Chapter 11 study, or when seeking the Lord beyond all images.
और मोक्ष नाम
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