ॐ प्रणवाय नमः
प्रणवः
Praṇavaḥ
Root: pra + ṇu
अर्थ
The sacred syllable Om itself, the primordial sound of all creation
स्वयं ओंकार (ॐ), सम्पूर्ण सृष्टि की आदि ध्वनि
शब्द-दर-शब्द विश्लेषण
प्रणव
Om, the sacred syllable, the primordial sound
ॐ, ओंकार, आदि ध्वनि
आधुनिक संदर्भ
प्रणव = ॐ। गीता (7.8) में कृष्ण कहते हैं 'प्रणवः सर्ववेदेषु,' सब वेदों में मैं ओंकार (ॐ) हूँ। ॐ ब्रह्माण्ड की प्रथम ध्वनि है, जिससे सब ध्वनियाँ निकलीं। माण्डूक्य उपनिषद पूरी तरह ॐ पर केन्द्रित है: अ+उ+म = जाग्रत+स्वप्न+सुषुप्ति, और तुरीय (चौथी अवस्था) ॐ का मौन है। हर सहस्रनाम ('ॐ विश्वाय नमः,' 'ॐ विष्णवे नमः') ॐ से शुरू होता है। प्रणव कहता है: वो ॐ स्वयं भगवान हैं।
कब जपें
ॐChant during Om meditation, Mandukya Upanishad study, at the beginning of any mantra, when Om's universality bridges cultures, or when the most sacred syllable IS the most sacred name.
और मोक्ष नाम
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