वैदिक शास्त्र ज्ञान
इस द्विभाषी प्रश्नोत्तरी में वेद, उपनिषद्, पुराण, षड्दर्शन और महान वैदिक विज्ञानों के अपने ज्ञान को परखें, जो Eternal Raga के शास्त्रों पर आधारित है।
16 प्रश्न · निःशुल्क · साइन-इन आवश्यक नहीं
📖 सभी प्रश्न और उत्तर देखेंइसमें उत्तर हैं — खेल समाप्त करने के बाद ही खोलें।
1. कौन-सा वेदाङ्ग वेद पुरुष की 'आँखें' कहा जाता है और खगोलशास्त्र तथा समय-गणना से सम्बन्धित है?
- ✓ ज्योतिष
- • शिक्षा
- • निरुक्त
- • छन्दस्
उत्तर: पाणिनीय शिक्षा के रूपक में ज्योतिष (खगोलशास्त्र और समय-गणना) वेद की आँखें हैं, क्योंकि यह अनुष्ठानों के सही समय को देखता है।
पूरी कथा पढ़ें →2. उपवेद वर्गीकरण में कौन-सा अनुप्रयुक्त विज्ञान परम्परागत रूप से सामवेद से जुड़ा है?
- • धनुर्वेद (युद्धकला)
- • आयुर्वेद (चिकित्सा)
- ✓ गान्धर्ववेद (संगीत और प्रदर्शन कलाएँ)
- • स्थापत्यवेद (वास्तुकला)
उत्तर: गान्धर्ववेद, संगीत, नृत्य और प्रदर्शन कलाओं का विज्ञान, सामवेद से जुड़ा उपवेद है, जिसके गायन से सात स्वर उत्पन्न होते हैं।
पूरी कथा पढ़ें →3. षड्दर्शनों में कणाद द्वारा स्थापित कौन-सा दर्शन प्रस्तावित करता है कि समस्त भौतिक सत्ता अविभाज्य परमाणुओं से बनी है?
- ✓ वैशेषिक
- • न्याय
- • सांख्य
- • पूर्व मीमांसा
उत्तर: कणाद द्वारा स्थापित वैशेषिक मानता है कि भौतिक सत्ता शाश्वत, अविभाज्य परमाणुओं (परमाणु) से बनी है और यह भारत का प्रकृति-दर्शन है।
पूरी कथा पढ़ें →4. पतंजलि के योगसूत्र योग को 'चित्त वृत्ति निरोध' परिभाषित करते हैं। इस वाक्यांश का क्या अर्थ है?
- • शरीर और श्वास का मिलन
- ✓ मन की वृत्तियों का निरोध
- • शारीरिक आसनों में निपुणता
- • सृष्टिकर्ता ईश्वर की उपासना
उत्तर: पतंजलि योग को चित्त वृत्ति निरोध, मन की वृत्तियों का निरोध, परिभाषित करते हैं, ताकि शुद्ध अवबोध (पुरुष) स्वयं को पहचान सके।
पूरी कथा पढ़ें →5. 27 नक्षत्रों में से प्रत्येक क्रान्तिवृत्त के ठीक कितने अंश फैलता है?
- ✓ 13 अंश 20 कला
- • 30 अंश
- • 15 अंश
- • 12 अंश
उत्तर: प्रत्येक नक्षत्र ठीक 13 अंश 20 कला फैलता है, ताकि 27 नक्षत्र मिलकर क्रान्तिवृत्त का पूरा 360 अंश का वृत्त बिना किसी शेष के बन्द कर दें।
पूरी कथा पढ़ें →6. नक्षत्र पद्धति में किसी नक्षत्र की 'योगतारा' क्या है?
- • नक्षत्र का अधिदेवता
- • वह तिथि जिस पर यह आरम्भ होता है
- ✓ लंगर या सन्धि तारा जो नक्षत्र को आकाश में एक बिन्दु से बाँधता है
- • वह ग्रह जो नक्षत्र पर शासन करता है
उत्तर: योगतारा किसी नक्षत्र के भीतर वह विशिष्ट उज्ज्वल लंगर (सन्धि) तारा है जो उसे खगोलीय गोले पर एक स्थिर बिन्दु से बाँधता है; उदाहरण के लिए चित्रा स्पाइका से बँधा है।
पूरी कथा पढ़ें →7. शास्त्र वृक्ष के अनुसार चार वेदों में सबसे प्राचीन कौन है, जो 10 मण्डलों में संगठित है?
- • यजुर्वेद
- • सामवेद
- ✓ ऋग्वेद
- • अथर्ववेद
उत्तर: ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद है, जिसमें 10 मण्डलों में संगठित 1,028 सूक्त और 10,552 मन्त्र हैं, जो मुख्यतः स्तुति-सूक्तों से बने हैं।
पूरी कथा पढ़ें →8. हर वेद में आन्तरिक रूप से चार परतें होती हैं। सबसे भीतरी, दार्शनिक परत कौन-सी है जिसे सामूहिक रूप से वेदान्त भी कहा जाता है?
- • संहिता
- • ब्राह्मण
- • आरण्यक
- ✓ उपनिषद्
उत्तर: उपनिषद् हर वेद की सबसे भीतरी, दार्शनिक परत हैं, संहिता, ब्राह्मण और आरण्यक के बाद, और इनका सामूहिक नाम वेदान्त का अर्थ है 'वेद का अन्त'।
पूरी कथा पढ़ें →9. कौन-से तीन ग्रन्थ मिलकर प्रस्थान त्रयी बनाते हैं, जो वेदान्त दर्शन की त्रिपाद नींव है?
- • चार वेद, वेदाङ्ग, और उपवेद
- ✓ उपनिषद्, ब्रह्मसूत्र, और भगवद्गीता
- • रामायण, महाभारत, और पुराण
- • न्यायसूत्र, योगसूत्र, और मीमांसासूत्र
उत्तर: प्रस्थान त्रयी में उपनिषद् (श्रुति प्रस्थान), ब्रह्मसूत्र (न्याय प्रस्थान), और भगवद्गीता (स्मृति प्रस्थान) शामिल हैं।
पूरी कथा पढ़ें →10. आदि शंकराचार्य ने कितने मुख्य (प्रधान) उपनिषदों पर भाष्य लिखा?
- • अठारह
- • एक सौ आठ
- • चार
- ✓ दस
उत्तर: दस उपनिषद् मुख्य (प्रधान) माने जाते हैं क्योंकि आदि शंकराचार्य ने इन पर भाष्य लिखा: ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डूक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, और बृहदारण्यक।
पूरी कथा पढ़ें →11. किस ग्रन्थ में ब्रह्मगुप्त ने 628 ई. में शून्य के पहले औपचारिक अंकगणितीय नियम बनाए?
- • आर्यभटीय
- • सूर्य सिद्धान्त
- ✓ ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त
- • बख्शाली पाण्डुलिपि
उत्तर: ब्रह्मगुप्त ने शून्य को संख्या के रूप में परिभाषित किया और उसके औपचारिक अंकगणितीय नियम अपने ब्रह्मस्फुटसिद्धान्त में दिए, जो 628 ई. में उज्जैन में लिखा गया।
पूरी कथा पढ़ें →12. 'पंचांग' शब्द का शाब्दिक अर्थ 'पाँच अंग' है। निम्नलिखित में से कौन-सा उन पाँच अंगों में से एक है?
- ✓ तिथि
- • राशि
- • लग्न
- • गोत्र
उत्तर: पंचांग के पाँच अंग हैं तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण; तिथि सूर्य से चन्द्र की कोणीय दूरी नापती है।
पूरी कथा पढ़ें →13. पंचांग में 'करण' क्या है?
- • एक पूर्ण चान्द्र मास
- • तारों में चन्द्रमा की स्थिति
- ✓ तिथि का आधा भाग
- • एक सौर दिन
उत्तर: करण तिथि का आधा है, जो तब आरम्भ होता है जब चन्द्रमा सूर्य से छह अंश आगे निकलता है, इसलिए हर तिथि में ठीक दो करण होते हैं।
पूरी कथा पढ़ें →14. हिन्दू युग ब्रह्माण्ड विज्ञान के अनुसार चार युगों की अवधि किस अनुपात का अनुसरण करती है?
- • 1:1:1:1
- ✓ 4:3:2:1
- • 1:2:4:8
- • 10:8:6:4
उत्तर: चार युग (सत्य, त्रेता, द्वापर, कलि) 4:3:2:1 के अनुपात का अनुसरण करते हैं, वही अनुपात जो प्राचीन पासा खेल के चार दाँवों का है जिनसे इनके नाम आते हैं।
पूरी कथा पढ़ें →15. कठोपनिषद् में युवा जिज्ञासु नचिकेता शाश्वत आत्मा का सत्य किस गुरु से सीखता है?
- ✓ यम, मृत्यु के देवता
- • अपने पिता वाजश्रवस
- • ऋषि याज्ञवल्क्य
- • इन्द्र, देवराज
उत्तर: कठोपनिषद् (कृष्ण यजुर्वेद) में नचिकेता यम, मृत्यु के देवता, के द्वार पर तीन दिन प्रतीक्षा करता है और तीसरे वरदान के रूप में शाश्वत आत्मा का ज्ञान प्राप्त करता है।
पूरी कथा पढ़ें →16. व्याकरण की महान कृति पाणिनि की अष्टाध्यायी चौदह ध्वनि-समूहों से आरम्भ होती है जो परम्परा के अनुसार शिव के डमरू से निकले। इन्हें क्या कहा जाता है?
- ✓ माहेश्वर (शिव) सूत्र
- • ब्रह्मसूत्र
- • प्रातिशाख्य
- • निरुक्त पद
उत्तर: चौदह माहेश्वर सूत्र (शिव सूत्र), जो शिव के डमरू की थापों से निकले कहे जाते हैं, अष्टाध्यायी के आरम्भ में हैं और संस्कृत की ध्वनियों को प्रत्याहार-सक्षम समूहों में व्यवस्थित करते हैं।
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