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कर्ण पर्व · अध्याय 3

सञ्जय द्वारा मारे गए पाण्डव-पक्ष के वीरों के नाम

धृतराष्ट्र सञ्जय से कहते हैं कि अब यह भी बताओ कि उनके अपने पक्ष के योद्धाओं ने पाण्डव-पक्ष के किन वीरों को मारा। सञ्जय एक-एक करके उनके नाम और उन्हें मारने वालों के नाम गिनाते हैं — भीष्म के हाथों गिरे हुए, सत्यजित्, पाञ्चाल, विराट और द्रुपद, अभिमन्यु, चेदि के धृष्टकेतु, सत्यधृति, सुकेतु, शतानीक, शङ्ख और उत्तर तथा और भी अनेक, जिनमें से अधिकांश द्रोण के हाथों मारे गए। अन्त में वे कहते हैं कि ये और पाण्डवों के दूसरे बहुत-से महारथी द्रोण द्वारा मारे गए, जिनके विषय में राजा ने पूछा था।

अध्याय 2अध्याय-सूचीअध्याय 4

धृतराष्ट्र उवाच

श्लोक 1 (8.3.1)

आख्याता मामकास्तात निहता युधि पाण्डवैः । हतांश्च पाण्डवेयानां मामकैर्ब्रूहि सञ्जय ॥

ākhyātā māmakāstāta nihatā yudhi pāṇḍavaiḥ | hatāṃśca pāṇḍaveyānāṃ māmakairbrūhi sañjaya

तात सञ्जय! तुमने पाण्डवों द्वारा युद्ध में मारे गए मेरे पक्ष के लोगों के नाम बता दिए; अब यह बताओ कि मेरे पक्ष के लोगों ने पाण्डव-पक्ष के किन वीरों को मारा।

सञ्जय उवाच

श्लोक 2 (8.3.2)

कृतिनो युधि विक्रान्ता महासत्वा महाबलाः । सानुबन्धाः सहामात्या गाङ्गेयेन निपातिताः ॥

kṛtino yudhi vikrāntā mahāsatvā mahābalāḥ | sānubandhāḥ sahāmātyā gāṅgeyena nipātitāḥ

युद्ध में कुशल और पराक्रमी, महान सत्त्व और बल वाले वे वीर अपने अनुयायियों और मन्त्रियों सहित गङ्गा-पुत्र भीष्म के हाथों गिरा दिए गए।

श्लोक 3 (8.3.3)

नारायणा वल्लवाश्च रामाश्च शतशोऽपरे । अनुरक्ताश्च वीरेण भीष्मेण युधि पातिताः ॥

nārāyaṇā vallavāśca rāmāśca śataśo'pare | anuraktāśca vīreṇa bhīṣmeṇa yudhi pātitāḥ

नारायण, वल्लव और राम नामक गण तथा सैकड़ों अन्य, अपने भक्त अनुयायियों सहित, वीर भीष्म के हाथों युद्ध में मार गिराए गए।

श्लोक 4 (8.3.4)

समः किरीटिना सङ्ख्ये वीर्येण च बलेन च । सत्यजित्सत्यसन्धेन द्रोणेन निहतो युधि ॥

samaḥ kirīṭinā saṅkhye vīryeṇa ca balena ca | satyajitsatyasandhena droṇena nihato yudhi

सत्यजित्, जो पराक्रम और बल में युद्ध के भीतर किरीटी अर्जुन के समान था, सत्यप्रतिज्ञ द्रोण के हाथों युद्ध में मारा गया।

श्लोक 5 (8.3.5)

पाञ्चालानां महेष्वासाः सर्वे युद्धविशारदाः । द्रोणेन सह सङ्गम्य गता वैवस्वतक्षयम् ॥

pāñcālānāṃ maheṣvāsāḥ sarve yuddhaviśāradāḥ | droṇena saha saṅgamya gatā vaivasvatakṣayam

पाञ्चाल देश के सभी महाधनुर्धर, जो युद्ध-कला में निपुण थे, द्रोण से भिड़कर यमलोक चले गए।

श्लोक 6 (8.3.6)

तथा विराटद्रुपदौ वृद्धौ सहसुतौ नृपौ । पराक्रमन्तौ मित्रार्थे द्रोणेन निहतौ रणे ॥

tathā virāṭadrupadau vṛddhau sahasutau nṛpau | parākramantau mitrārthe droṇena nihatau raṇe

इसी प्रकार वृद्ध राजा विराट और द्रुपद अपने पुत्रों सहित मित्र के लिए पराक्रम दिखाते हुए युद्ध में द्रोण के हाथों मारे गए।

श्लोक 7 (8.3.7)

यो बाल एव समरे सम्मितः सव्यसाचिना । केशवेन च दुर्धर्षो बलदेवेन चाभिभूः ॥

yo bāla eva samare sammitaḥ savyasācinā | keśavena ca durdharṣo baladevena cābhibhūḥ

वह, जो बालक होते हुए भी युद्ध में सव्यसाची और केशव के समान माना जाता था, जिसे बलदेव भी कठिनाई से जीत सकते थे, और जो सबको परास्त करने वाला था —

श्लोक 8 (8.3.8)

परेषां कदनं कृत्वा महद्रणविशारदः । परिवार्य महामात्रैः षड्भिः परमकै रथैः । अशक्नुवद्भिर्बीभत्सुमभिमन्युर्निपातितः ॥

pareṣāṃ kadanaṃ kṛtvā mahadraṇaviśāradaḥ | parivārya mahāmātraiḥ ṣaḍbhiḥ paramakai rathaiḥ | aśaknuvadbhirbībhatsumabhimanyurnipātitaḥ

अभिमन्यु, जो महान युद्ध-कला में निपुण था, शत्रुओं का संहार करके, श्रेष्ठ रथों पर बैठे छह महामात्रों से घिरकर मारा गया — वे छहों बीभत्सु अर्जुन का सामना करने में असमर्थ थे।

श्लोक 9 (8.3.9)

कृतं तं विरथं वीरं क्षत्रधर्मे व्यवस्थितम् । दौःशासनिर्महाराज सौभद्रं हतवान्रणे ॥

kṛtaṃ taṃ virathaṃ vīraṃ kṣatradharme vyavasthitam | dauḥśāsanirmahārāja saubhadraṃ hatavānraṇe

महाराज! जब क्षत्रिय-धर्म में स्थित उस वीर को रथहीन कर दिया गया, तब दुःशासन के पुत्र ने युद्ध में सुभद्रा-पुत्र को मार डाला।

श्लोक 10 (8.3.10)

पटच्चरनिहन्ता च महत्या सेनया वृतः । अम्बष्ठस्य सुतः श्रीमान्मित्रहेतोः पराक्रमन् ॥

paṭaccaranihantā ca mahatyā senayā vṛtaḥ | ambaṣṭhasya sutaḥ śrīmānmitrahetoḥ parākraman

अम्बष्ठ का तेजस्वी पुत्र, जो पटच्चर का वध करने वाला था, बड़ी सेना से घिरकर मित्र के लिए पराक्रम दिखाते हुए —

श्लोक 11 (8.3.11)

आसाद्य लक्ष्मणं वीरं दुर्योधनसुतं रणे । सुमहत्कदनं कृत्वा गतो वैवस्वतक्षयम् ॥

āsādya lakṣmaṇaṃ vīraṃ duryodhanasutaṃ raṇe | sumahatkadanaṃ kṛtvā gato vaivasvatakṣayam

दुर्योधन-पुत्र वीर लक्ष्मण से युद्ध में भिड़कर और भारी संहार करके यमलोक चला गया।

श्लोक 12 (8.3.12)

बृहन्तः सुमहेष्वासः कृतास्त्रो युद्धदुर्मदः । दुःशासनेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ॥

bṛhantaḥ sumaheṣvāsaḥ kṛtāstro yuddhadurmadaḥ | duḥśāsanena vikramya gamito yamasādanam

बृहन्त, जो महान धनुर्धर, अस्त्रों में कुशल और युद्ध में उन्मत्त-सा था, दुःशासन के पराक्रम से यमलोक भेज दिया गया।

श्लोक 13 (8.3.13)

मणिमान्दण्डधारश्च राजानौ युद्धदुर्मदौ । पराक्रमन्तौ मित्रार्थे द्रोणेन युधि पातितौ ॥

maṇimāndaṇḍadhāraśca rājānau yuddhadurmadau | parākramantau mitrārthe droṇena yudhi pātitau

राजा मणिमान् और दण्डधार, जो युद्ध में उन्मत्त-से थे और मित्र के लिए पराक्रम दिखा रहे थे, द्रोण के हाथों युद्ध में गिरा दिए गए।

श्लोक 14 (8.3.14)

अंशुमान्भोजराजस्तु सहसैन्यो महारथः । भारद्वाजेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ॥

aṃśumānbhojarājastu sahasainyo mahārathaḥ | bhāradvājena vikramya gamito yamasādanam

भोजराज अंशुमान्, जो सेना सहित महारथी थे, भारद्वाज-पुत्र द्रोण के पराक्रम से यमलोक भेज दिए गए।

श्लोक 15 (8.3.15)

सामुद्रश्चित्रसेनश्च सह पुत्रेण भारत । समुद्रसेनेन बलाद्गमितो यमसादनम् ॥

sāmudraścitrasenaśca saha putreṇa bhārata | samudrasenena balādgamito yamasādanam

हे भारत! समुद्र-तट का राजा चित्रसेन अपने पुत्र के साथ समुद्रसेन के हाथों बलपूर्वक यमलोक भेज दिया गया।

श्लोक 16 (8.3.16)

अनूपवासी नीलश्च व्याध्रदत्तश्च वीर्यवान् । अश्वत्थाम्ना विकर्णेन गमितौ यमसादनम् ॥

anūpavāsī nīlaśca vyādhradattaśca vīryavān | aśvatthāmnā vikarṇena gamitau yamasādanam

अनूप देश के निवासी नील और पराक्रमी व्याघ्रदत्त को अश्वत्थामा और विकर्ण ने यमलोक पहुँचा दिया।

श्लोक 17 (8.3.17)

चित्रायुधश्चित्रयोधी कृत्वा च कदनं महत् । चित्रमार्गेण विक्रम्य विकर्णेन हतो मृधे ॥

citrāyudhaścitrayodhī kṛtvā ca kadanaṃ mahat | citramārgeṇa vikramya vikarṇena hato mṛdhe

चित्रायुध, जो अद्भुत ढंग से लड़ने वाला योद्धा था, भारी संहार करके और विचित्र रीति से पराक्रम दिखाकर, युद्ध में विकर्ण के हाथों मारा गया।

श्लोक 18 (8.3.18)

वृकोदरसमो युद्धे वृतः केकयजो युधि । केकयेन च विक्रम्य भ्राता भ्रात्रा निपातितः ॥

vṛkodarasamo yuddhe vṛtaḥ kekayajo yudhi | kekayena ca vikramya bhrātā bhrātrā nipātitaḥ

वृकोदर भीम के समान युद्ध में पराक्रमी एक केकय-राजकुमार, अपने सैनिकों से घिरा हुआ, एक दूसरे केकय के पराक्रम से — भाई के हाथों भाई — मारा गया।

श्लोक 19 (8.3.19)

जनमेजयो गदायोधी पार्वतीयः प्रतापवान् । दुर्मुखेन महाराज तव पुत्रेण पातितः ॥

janamejayo gadāyodhī pārvatīyaḥ pratāpavān | durmukhena mahārāja tava putreṇa pātitaḥ

महाराज! पर्वतीय प्रदेश का प्रतापी गदायोद्धा जनमेजय आपके पुत्र दुर्मुख के हाथों गिरा दिया गया।

श्लोक 20 (8.3.20)

रोचमानौ नरव्याघ्रौ रोचमानौ ग्रहाविव । द्रौणेन युगपद्राजन्दिवं सम्प्रेषितौ शरैः ॥

rocamānau naravyāghrau rocamānau grahāviva | drauṇena yugapadrājandivaṃ sampreṣitau śaraiḥ

दोनों रोचमान, जो नरों में व्याघ्र के समान थे और दो ग्रहों की तरह चमकते थे, राजन्! द्रोण-पुत्र के बाणों से एक साथ स्वर्ग भेज दिए गए।

श्लोक 21 (8.3.21)

नृपाश्च प्रतियुध्यन्तः पराक्रान्ता विशाम्पते । कृत्वा नसुकरं कर्म गता वैवस्वतक्षयम् ॥

nṛpāśca pratiyudhyantaḥ parākrāntā viśāmpate | kṛtvā nasukaraṃ karma gatā vaivasvatakṣayam

हे प्रजापति! और भी राजा, जिन्होंने सामना करके बड़ा पराक्रम दिखाया, दुष्कर कर्म करके यमलोक चले गए।

श्लोक 22 (8.3.22)

पुरुजित्कुन्तिभोजश्च मातुलौ सव्यसाचिनः । संग्रामनिर्जिताँल्लोकान्गमितौ द्रोणसायकैः ॥

purujitkuntibhojaśca mātulau savyasācinaḥ | saṃgrāmanirjitām̐llokāngamitau droṇasāyakaiḥ

सव्यसाची के दोनों मामा, पुरुजित् और कुन्तिभोज, द्रोण के बाणों से युद्ध में जीते हुए लोकों को पहुँचा दिए गए।

श्लोक 23 (8.3.23)

अभिभूः काशिराजश्च काशिकैर्बहुभिर्वृतः । वसुदानस्य पुत्रेण त्याजितो देहमाहवे ॥

abhibhūḥ kāśirājaśca kāśikairbahubhirvṛtaḥ | vasudānasya putreṇa tyājito dehamāhave

काशिराज अभिभू, अनेक काशिवासी योद्धाओं से घिरे हुए, वसुदान के पुत्र के हाथों युद्ध में देह त्यागने को विवश किए गए।

श्लोक 24 (8.3.24)

अमितौजा युधामन्युरुत्तमौजाश्च वीर्यवान् । निहत्य शतशः शूरानस्मदीयैर्निपातिताः ॥

amitaujā yudhāmanyuruttamaujāśca vīryavān | nihatya śataśaḥ śūrānasmadīyairnipātitāḥ

अमितौजा, युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा सैकड़ों शूरों को मारकर हमारे पक्ष के लोगों द्वारा मार गिराए गए।

श्लोक 25 (8.3.25)

मित्रवर्मा च पाञ्चाल्यः क्षत्रधर्मा च भारत । द्रोणेन परमेष्वासौ गमितौ यमसादनम् ॥

mitravarmā ca pāñcālyaḥ kṣatradharmā ca bhārata | droṇena parameṣvāsau gamitau yamasādanam

हे भारत! पाञ्चाल देश के मित्रवर्मा और क्षत्रधर्मा, दोनों श्रेष्ठ धनुर्धर, द्रोण के हाथों यमलोक भेज दिए गए।

श्लोक 26 (8.3.26)

शिखण्डितनयो युद्धे क्षत्रदेवो युधाम्पतिः । लक्ष्मणेन हतो राजंस्तव पौत्रेण भारत ॥

śikhaṇḍitanayo yuddhe kṣatradevo yudhāmpatiḥ | lakṣmaṇena hato rājaṃstava pautreṇa bhārata

राजन्! शिखण्डी का पुत्र, योद्धाओं का स्वामी क्षत्रदेव, युद्ध में आपके पौत्र लक्ष्मण के हाथों मारा गया, हे भारत!

श्लोक 27 (8.3.27)

सुचित्रश्चित्रवर्मा च पितापुत्रौ महारथौ । प्रचरन्तौ महावीरौ द्रोणेन निहतौ रणे ॥

sucitraścitravarmā ca pitāputrau mahārathau | pracarantau mahāvīrau droṇena nihatau raṇe

सुचित्र और चित्रवर्मा, पिता और पुत्र, दोनों महारथी और महान वीर, रण में विचरते हुए द्रोण के हाथों मारे गए।

श्लोक 28 (8.3.28)

वार्धक्षेमिर्महाराज समुद्र इव पर्वणि । आयुधक्षयमासाद्य प्रशान्तिं परमां गतः ॥

vārdhakṣemirmahārāja samudra iva parvaṇi | āyudhakṣayamāsādya praśāntiṃ paramāṃ gataḥ

महाराज! पर्व के दिन के समुद्र के समान वार्धक्षेमि, शस्त्र समाप्त हो जाने पर परम शान्ति को प्राप्त हुआ।

श्लोक 29 (8.3.29)

सेनाबिन्दुसुतः श्रेष्ठः शास्त्रवान्प्रहरन्युधि । बाह्लिकेन महाराज कौरवेन्द्रेण पातितः ॥

senābindusutaḥ śreṣṭhaḥ śāstravānpraharanyudhi | bāhlikena mahārāja kauravendreṇa pātitaḥ

महाराज! सेनाबिन्दु का श्रेष्ठ पुत्र, जो शास्त्रों का ज्ञाता था, युद्ध में प्रहार करते हुए कुरुओं के स्वामी बाह्लीक के हाथों गिरा दिया गया।

श्लोक 30 (8.3.30)

धृष्टकेतुर्महाराज चेदीनां प्रवरो रथः । कृत्वा नसुकरं कर्म गतो वैवस्वतक्षयम् ॥

dhṛṣṭaketurmahārāja cedīnāṃ pravaro rathaḥ | kṛtvā nasukaraṃ karma gato vaivasvatakṣayam

महाराज! चेदियों में श्रेष्ठ रथी धृष्टकेतु दुष्कर कर्म करके यमलोक चले गए।

श्लोक 31 (8.3.31)

तथा सत्यधृतिर्वीरः कृत्वा कदनमाहवे । पाण्डवार्थे पराक्रान्तो गमितो यमसादनम् ॥

tathā satyadhṛtirvīraḥ kṛtvā kadanamāhave | pāṇḍavārthe parākrānto gamito yamasādanam

इसी प्रकार वीर सत्यधृति युद्ध में संहार करके और पाण्डवों के लिए बड़ा पराक्रम दिखाकर यमलोक भेज दिए गए।

श्लोक 32 (8.3.32)

पुत्रस्तु शिशुपालस्य सुकेतुः पृथिवीपतिः । निहत्य शात्रवान्सङ्ख्ये द्रोणेन निहतो युधि ॥

putrastu śiśupālasya suketuḥ pṛthivīpatiḥ | nihatya śātravānsaṅkhye droṇena nihato yudhi

शिशुपाल के पुत्र राजा सुकेतु शत्रुओं को युद्ध में मारकर स्वयं द्रोण के हाथों मारे गए।

श्लोक 33 (8.3.33)

तथा सत्यधृतिर्वीरो मदिराश्वश्च वीर्यवान् । सूर्यदत्तश्च विक्रान्तो निहतो द्रोणसायकैः ॥

tathā satyadhṛtirvīro madirāśvaśca vīryavān | sūryadattaśca vikrānto nihato droṇasāyakaiḥ

इसी प्रकार वीर सत्यधृति, पराक्रमी मदिराश्व और शूर सूर्यदत्त द्रोण के बाणों से मारे गए।

श्लोक 34 (8.3.34)

मात्स्यादवरजः श्रीमाञ्शतानीको निपातितः । श्रेणिमांश्च महाराज युध्यमानः पराक्रमी । कृत्वा नसुकरं कर्म गतो वैवस्वतक्षयम् ॥

mātsyādavarajaḥ śrīmāñśatānīko nipātitaḥ | śreṇimāṃśca mahārāja yudhyamānaḥ parākramī | kṛtvā nasukaraṃ karma gato vaivasvatakṣayam

मत्स्यराज का छोटा भाई तेजस्वी शतानीक मार गिराया गया; और महाराज! पराक्रमी श्रेणिमान् लड़ते हुए दुष्कर कर्म करके यमलोक चले गए।

श्लोक 35 (8.3.35)

तथैव युधि विक्रान्तो मागधः परमास्त्रवित् । भीष्मेण निहतो राजञ्शेतेऽद्य परवीरहा ॥

tathaiva yudhi vikrānto māgadhaḥ paramāstravit | bhīṣmeṇa nihato rājañśete'dya paravīrahā

इसी प्रकार शत्रु-वीरों का नाश करने वाला, उत्तम अस्त्रों का ज्ञाता और पराक्रमी मगधराज, राजन्! भीष्म के हाथों मारा गया और आज पड़ा सो रहा है।

श्लोक 36 (8.3.36)

विराटपुत्रः शङ्खस्तु उत्तरश्च महारथः । कुर्वन्तौ सुमहत्कर्म गतौ वैवस्वतक्षयम् ॥

virāṭaputraḥ śaṅkhastu uttaraśca mahārathaḥ | kurvantau sumahatkarma gatau vaivasvatakṣayam

विराट के पुत्र शङ्ख और महारथी उत्तर, महान कर्म करते हुए यमलोक चले गए।

श्लोक 37 (8.3.37)

वसुदानश्च कदनं कुर्वाणोऽतीव संयुगे । भारद्वाजेन विक्रम्य गमितो यमसादनम् ॥

vasudānaśca kadanaṃ kurvāṇo'tīva saṃyuge | bhāradvājena vikramya gamito yamasādanam

और वसुदान, जो युद्ध में भारी संहार कर रहा था, भारद्वाज-पुत्र द्रोण के पराक्रम से यमलोक भेज दिया गया।

श्लोक 38 (8.3.38)

एते चान्ये च बहवः पाण्डवानां महारथाः । हता द्रोणेन विक्रम्य यन्मां त्वं परिपृच्छसि ॥

ete cānye ca bahavaḥ pāṇḍavānāṃ mahārathāḥ | hatā droṇena vikramya yanmāṃ tvaṃ paripṛcchasi

ये और पाण्डवों के दूसरे बहुत-से महारथी द्रोण के पराक्रम से मारे गए, जिनके विषय में आप मुझसे पूछ रहे हैं।

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