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शान्ति पर्व · अध्याय 326

आसुरि का कपिल से अव्यक्त और व्यक्त तत्त्वों पर प्रश्न

युधिष्ठिर भीष्म से अव्यक्त और व्यक्त तत्त्वों का निश्चित सिद्धान्त पूछते हैं। भीष्म गुरु कपिल और शिष्य आसुरि के एक प्राचीन संवाद का उल्लेख करते हैं, जो सब दुःखों से मुक्त करने वाला कहा गया है। फिर आसुरि कपिल से प्रश्नों की लम्बी शृंखला रखते हैं — व्यक्त और अव्यक्त क्या हैं, तत्त्व कितने हैं, सृष्टि और प्रलय क्या हैं, तथा विद्या और अविद्या क्या हैं।

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युधिष्ठिर उवाच

श्लोक 1 (12.326.1)

अव्यक्तव्यक्ततत्वानां निश्चयं भरतर्षभ । वक्तुमर्हसि कौरव्य देवस्याजस्य या कृतिः ॥

avyaktavyaktatatvānāṃ niścayaṃ bharatarṣabha | vaktumarhasi kauravya devasyājasya yā kṛtiḥ

हे भरतश्रेष्ठ, हे कुरुवंशी, अव्यक्त और व्यक्त तत्त्वों का निश्चित सिद्धान्त तथा अजन्मा देव की जो रचना है, वह आप मुझे बताइए।

भीष्म उवाच

श्लोक 2 (12.326.2)

अत्राप्युदाहरन्तीमं संवादं गुरुशिष्ययोः । कपिलस्यासुरेश्चैव सर्वदुःखविमोक्षणम् ॥

atrāpyudāharantīmaṃ saṃvādaṃ guruśiṣyayoḥ | kapilasyāsureścaiva sarvaduḥkhavimokṣaṇam

इसी विषय में गुरु और शिष्य — कपिल और आसुरि — के इस संवाद का उदाहरण दिया जाता है, जो सब दुःखों से मुक्त करने वाला है।

आसुरिरुवाच

श्लोक 3 (12.326.3)

अव्यक्तव्यक्ततत्वानां निश्चयं बुद्धिनिश्चयम् । भगवन्नमितप्रज्ञ वक्तुमर्हसि मेऽर्थितः ॥

avyaktavyaktatatvānāṃ niścayaṃ buddhiniścayam | bhagavannamitaprajña vaktumarhasi me'rthitaḥ

हे भगवन्, अपार प्रज्ञा वाले, मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ; अव्यक्त और व्यक्त तत्त्वों का वह निश्चय, जो बुद्धि का निर्णय है, आप मुझे बताइए।

श्लोक 4 (12.326.4)

किं व्यक्तं किमव्यक्तं किं व्यक्ता । व्यक्तं किमिति तत्वानि । किमाद्यं मध्यमं च तत्वानां । किमध्यात्माधिभूतदैवतं च ॥

kiṃ vyaktaṃ kimavyaktaṃ kiṃ vyaktā | vyaktaṃ kimiti tatvāni | kimādyaṃ madhyamaṃ ca tatvānāṃ | kimadhyātmādhibhūtadaivataṃ ca

व्यक्त क्या है, अव्यक्त क्या है, और व्यक्ताव्यक्त क्या है? तत्त्व कौन-से हैं? तत्त्वों का आदि क्या है और मध्य क्या है? और अध्यात्म, अधिभूत तथा दैवत क्या हैं?

श्लोक 5 (12.326.5)

किंनु सर्गाप्ययं कति सर्गाः किं भूतं । किं भविष्यं किं भव्यं च किं ज्ञानम् । को ज्ञाता किं बुद्धं किमप्रबुद्धं । किं बुध्यमानं कति पर्वाणि ॥

kiṃnu sargāpyayaṃ kati sargāḥ kiṃ bhūtaṃ | kiṃ bhaviṣyaṃ kiṃ bhavyaṃ ca kiṃ jñānam | ko jñātā kiṃ buddhaṃ kimaprabuddhaṃ | kiṃ budhyamānaṃ kati parvāṇi

सृष्टि और प्रलय क्या हैं? सृष्टियाँ कितनी हैं? भूत क्या है, भविष्य क्या है और भव्य क्या है? ज्ञान क्या है? ज्ञाता कौन है? बुद्ध क्या है, अप्रबुद्ध क्या है और बुध्यमान क्या है? पर्व कितने हैं?

श्लोक 6 (12.326.6)

कति स्रोतांसि कति कर्मयोनयः । किमेकत्वं नानात्वम् । किं सहवासं निवासं । किं विद्याविद्यमिति ॥

kati srotāṃsi kati karmayonayaḥ | kimekatvaṃ nānātvam | kiṃ sahavāsaṃ nivāsaṃ | kiṃ vidyāvidyamiti

स्रोत कितने हैं? कर्मयोनियाँ कितनी हैं? एकत्व क्या है और नानात्व क्या है? सहवास क्या है और निवास क्या है? विद्या क्या है और अविद्या क्या है?

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