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पूर्वखण्ड — आचारकाण्ड · अध्याय 10

लक्ष्मी-अर्चन

अध्याय 9अध्याय-सूचीअध्याय 11

श्लोक 1 (garuda.1.10.1)

।।हरिरुवाच । श्र्यादिपूजां प्रवश्र्यामि स्थण्डिलादिषु सिद्धये । श्रीं ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः । श्रां श्रीं श्रूं श्रैं श्रौं श्रः क्रमाद्धृदयं च शिरः शिखाम् । कवचं नेत्रमस्त्रं च आसनं मूर्त्तिमर्चयेत्

hariruvāca śryādipūjāṁ pravaśryāmi sthaṇḍilādiṣu siddhaye śrīṁ hrīṁ mahālakṣmyai namaḥ śrāṁ śrīṁ śrūṁ śraiṁ śrauṁ śraḥ kramāddhṛdayaṁ ca śiraḥ śikhām kavacaṁ netramastraṁ ca āsanaṁ mūrttimarcayet

हरि ने कहा — मैं श्री (लक्ष्मी) आदि की वह पूजा बताऊँगा, जो वेदी आदि पर सिद्धि के लिए की जाती है। 'श्रीं ह्रीं, महालक्ष्मी को नमस्कार।' श्रां, श्रीं, श्रूं, श्रैं, श्रौं, श्रः — ये क्रमशः हृदय, शिर, शिखा, कवच, नेत्र और अस्त्र (के न्यास के मंत्र हैं)। तत्पश्चात् आसन और मूर्ति की पूजा करे।

श्लोक 2 (garuda.1.10.2)

मण्डले पद्मगर्भे च चतुर्द्वारि रजोऽन्विते । चतुः षष्ट्यन्तमष्टादि खाक्षेखाक्षेखान्यादि मण्डलम्

maṇḍale padmagarbhe ca caturdvāri rajo'nvite catuḥ ṣaṣṭyantamaṣṭādi khākṣekhākṣekhānyādi maṇḍalam

कमल-गर्भ वाले, चार द्वारों से युक्त, रंगीन चूर्ण से बने मंडल में, चौंसठ कोष्ठकों तक विस्तृत, आठ से आरंभ होने वाला (यह) मंडल है।

श्लोक 3 (garuda.1.10.3)

खाक्षीन्दुसूर्य्यगं सर्वं खादिवेदेन्दुवर्त्तनात् । लक्ष्मीमंगानि चैकस्मिन्कोणे दुर्गां गणं गुरुम्

khākṣīndusūryyagaṁ sarvaṁ khādivedenduvarttanāt lakṣmīmaṁgāni caikasminkoṇe durgāṁ gaṇaṁ gurum

आकाश, नेत्र, चंद्र और सूर्य की गिनतियों से समस्त माप निर्धारित करे, आकाश, वेद और चंद्र की संख्याओं के अनुसार क्रम बदलते हुए। लक्ष्मी और उनकी सहचरी शक्तियों को, तथा एक कोण में दुर्गा, गणपति और गुरु को स्थापित करे।

श्लोक 4 (garuda.1.10.4)

क्षेत्रपालमथाग्न्यादौ होमाज्जुहाव कामभाक् । ॐ घं टं डं हं श्रीमहालक्ष्म्यै नमः

kṣetrapālamathāgnyādau homājjuhāva kāmabhāk oṁ ghaṁ ṭaṁ ḍaṁ haṁ śrīmahālakṣmyai namaḥ

तथा क्षेत्रपाल को अग्नि-कोण आदि में स्थापित करे। इच्छित फल चाहने वाला साधक होम से आहुति दे — 'ॐ घं टं डं हं, श्री महालक्ष्मी को नमस्कार।'

श्लोक 5 (garuda.1.10.5)

अनेन पूजयेल्लक्ष्मीं पूर्वोक्तपरिवारकैः । ॐ सौं सरस्वत्यै नमः । ॐ ह्रीं सौं सरस्वत्यै नमः

anena pūjayellakṣmīṁ pūrvoktaparivārakaiḥ oṁ sauṁ sarasvatyai namaḥ oṁ hrīṁ sauṁ sarasvatyai namaḥ

इसी मंत्र से, पूर्वोक्त परिवार-देवताओं सहित, लक्ष्मी का पूजन करे। 'ॐ सौं, सरस्वती को नमस्कार।' 'ॐ ह्रीं सौं, सरस्वती को नमस्कार।'

श्लोक 6 (garuda.1.10.6)

ॐ ह्रीं वदवदवाग्वादिनिस्वाहा ॐ ह्रीं सरस्वत्यै नमः

oṁ hrīṁ vadavadavāgvādinisvāhā oṁ hrīṁ sarasvatyai namaḥ

'ॐ ह्रीं, बोल बोल हे वाग्वादिनी, स्वाहा।' 'ॐ ह्रीं, सरस्वती को नमस्कार।'

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